पंकज कुमार/न्यूज11 भारत
घाघरा/डेस्क: घाघरा देश की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीद संतोष उरांव की टूटी प्रतिमा को दोबारा स्थापित कराने के लिए आखिरकार उनकी मां ने खुद पहल की. घाघरा के चपका चैनपुर मार्ग पर स्थापित तुरियाडीह निवासी शहीद संतोष उरांव की प्रतिमा करीब एक महीने से अधिक समय से टूटकर जमीन पर पड़ी थी. प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाने के बावजूद जब कोई ठोस पहल नहीं हुई तो शहीद की मां गीता देवी ने अपनी निजी राशि से करीब 3 लाख रुपये खर्च कर सोमवार को बेटे की नई आदमकद प्रतिमा स्थापित करा दी. प्रतिमा के दोबारा स्थापित होने के बाद स्थानीय ग्रामीणों में जहां शहीद की मां के प्रति सम्मान देखने को मिला, वहीं प्रशासनिक व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली को लेकर लोगों में नाराजगी भी है.
घटिया निर्माण से टूट गई थी प्रतिमा ग्रामीण
स्थानीय लोगों के अनुसार शहीद संतोष उरांव की स्मृति में सड़क किनारे स्थापित प्रतिमा गुणवत्ताहीन निर्माण सामग्री के कारण टूटकर गिर गई थी. करीब एक महीने तक प्रतिमा का मलबा स्थल पर पड़ा रहा. लोगों का कहना है कि शहीद की प्रतिमा का इस तरह उपेक्षित पड़ा रहना बेहद दुखद और शर्मनाक था.
तीन बार मंत्री से मिलीं, फिर भी नहीं मिली मदद गीता देवी
शहीद की मां गीता देवी ने कहा मेरे बेटे की प्रतिमा घटिया मैटेरियल से बनवाई गई थी जिसके कारण वह टूटकर गिर गई. प्रतिमा दोबारा लगवाने के लिए मैं स्थानीय विधायक सह मंत्री चमरा लिंडा से तीन बार मिली. अधिकारियों के पास भी गई और लगातार दौड़-भाग करती रही, लेकिन मुझे सिर्फ आश्वासन मिला. एक महीने तक मेरे बेटे की प्रतिमा जमीन पर पड़ी रही. आखिरकार मैंने खुद अपने पैसे से करीब तीन लाख रुपये खर्च कर अपने बेटे की प्रतिमा दोबारा लगवाई. उन्होंने कहा कि शहीदों का सम्मान करना प्रशासन का फर्ज था, लेकिन जब किसी ने जिम्मेदारी नहीं निभाई तो मैंने एक मां का फर्ज निभाया.
ग्रामीणों ने जताई नाराजगी
ग्रामीणों ने कहा कि देश के लिए जान देने वाले शहीद की प्रतिमा की ऐसी दुर्दशा प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की संवेदनशीलता पर सवाल खड़ा करती है. लोगों ने मांग की कि शहीद स्मारक और प्रतिमाओं की नियमित देखरेख की व्यवस्था हो, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो.
सिस्टम की बेरुखी पर भारी पड़ी मां की ममता बेटे को दिलाया सम्मान
जब सिस्टम ने साथ नहीं दिया, तो मां बनी सहारा.
शहीद संतोष उरांव की टूटी प्रतिमा को दोबारा स्थापित कराने के लिए मां गीता देवी ने किसी सरकारी सहायता का इंतजार नहीं किया. करीब 3 लाख रुपये अपनी जेब से खर्च कर सोमवार को बेटे की नई प्रतिमा स्थापित कराई.
तीन बार लगाई गुहार, मिला सिर्फ आश्वासन शहीद की मां गीता देवी
मंत्री से तीन बार मिली, अधिकारियों के चक्कर लगाए, लेकिन प्रतिमा लगवाने के लिए कोई ठोस पहल नहीं हुई. आखिर मैंने खुद पैसे की व्यवस्था कर प्रतिमा लगवाई.
शहीदों की प्रतिमाओं की देखरेख की जिम्मेदारी किसकी
अगर शहीद की प्रतिमा टूटकर एक महीने तक जमीन पर पड़ी रही और उसे दोबारा स्थापित कराने के लिए मां को अपनी जिंदगी की कमाई से 3 लाख रुपये खर्च करने पड़े, तो प्रशासनिक व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी पर सवाल उठना स्वाभाविक है.
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