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रांची/डेस्क: 26 जनवरी पर इस साल लॉन्ग वीकेंड बन रहा हैं. सोमवार को ऑफिशियल छुट्टी होने के चलते अगर आप शुक्रवार शाम से निकलते है तो 3 से 4 दिन का आरामदायक ट्रिप प्लान किया जा सकता हैं. दिल्ली-एनसीआर से कम दूरी पर मौजूद धार्मिक और पर्यटन स्थलों में वृंदावन एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरा हैं.
कृष्ण नगरी वृंदावन क्यों है खास?
मथुरा से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित वृंदावन का इतिहास भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़ा हैं. मान्यता है कि यहीं कान्हा का बचपन बीता था। दिल्ली से लगभग 250 किलोमीटर की दूरी पर बसे इस शहर में कदम रखते ही भक्ति, शांति और आध्यात्मिक माहौल महसूस होता हैं. यही वजह है कि देश-विदेश से श्रद्धालु और टूरिस्ट यहां पहुंचते हैं.
बांके बिहारी मंदिर, आस्था का केंद्र
वृंदावन का सबसे प्रसिद्ध स्थल बांके बिहारी मंदिर हैं. राजस्थानी शैली में बने इस भव्य मंदिर की स्थापना स्वामी हरिदास जी ने की थी. यहां आरती नहीं होती, बल्कि ठाकुर जी की सेवा और दर्शन की परंपरा हैं. श्रद्धालुओं को बार-बार दर्शन से विचलित न किया जाए, इसलिए कुछ समय बाद पर्दा डाल दिया जाता हैं.
प्रेम मंदिर, शांति और सौंदर्य का संगम
इटालियन वाइट संगमरमर से बना प्रेम मंदिर अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता हैं. मंदिर की दीवारों पर कृष्ण लीलाओं की अद्भुत मूर्तिकला देखने को मिलती हैं. शाम के समय यहां होने वाला लाइट एंड साउंड शो पर्यटकों को खासा आकर्षित करता हैं. भीड़ के बीच भी यहां बैठते ही एक अलग सुकून महसूस होता हैं.
इस्कॉन मंदिर, भक्ति का वैश्विक केंद्र
वृंदावन स्थित इस्कॉन मंदिर विदेशी पर्यटकों की पहली पसंद माना जाता हैं. यहां रोज गीता पाठ और हरे कृष्ण महामंत्र का जाप होता हैं. मंदिर में भगवान कृष्ण और बलराम की भव्य मूर्तियां स्थापित हैं, जिनके दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.
निधिवन, रहस्य और आस्था की अनोखी जगह
निधिवन को लेकर कई रहस्यमयी मान्यताएं प्रचलित हैं. कहा जाता है कि यहां राधा-कृष्ण और गोपियों की रासलीला होती हैं. मान्यता के अनुसार, सूर्यास्त के बाद कोई भी व्यक्ति यहां नहीं रुकता और पुजारी भी शाम ढलते ही इस स्थान को छोड़ देते हैं.
केशी घाट, यमुना आरती और दिव्य नजारे
केशी घाट को भगवान कृष्ण की लीला स्थली माना जाता हैं. यहां यमुना आरती का दृश्य बेहद मनमोहक होता हैं. सनराइज और सनसेट के समय घाट पर बैठकर यमुना के दर्शन करना एक यादगार अनुभव बन जाता हैं.
इन मंदिरों और स्थलों को भी करें एक्सप्लोर
वृंदावन रंगजी मंदिर, मदन मोहन मंदिर, गोविंद देव जी मंदिर और सेवा कुंज भी दर्शनीय स्थलों में शामिल है, जहां भक्तों की आस्था देखने को मिलती हैं.
वृंदावन का स्ट्रीट फूड, स्वाद जो याद रह जाए
दर्शन के बाद अगर आपने वृंदावन का खानपान नहीं चखा तो यात्रा अधूरी मानी जाती हैं. यहां की लस्सी, दूध और मलाई बेहद मशहूर हैं. करीब 40 से 60 रुपये में मिलने वाली एक गिलास लस्सी इतनी गाढ़ी होती है कि पेट भर जाए. कई दुकानें 50-60 साल पुरानी हैं.
नाश्ते में बेड़मी पूरी और आलू की सब्जी
वृंदावन की बेड़मी पूरी और आलू की सब्जी का स्वाद अलग ही पहचान रखता हैं. इसके अलावा समोसे और कचौड़ी भी यहां की खासियत है, जिन्हें श्रद्धालु बड़े चाव से खाते हैं.
जयपुरिया भवन का सात्विक भोजन
जयपुरिया भवन वृंदावन का मशहूर सात्विक भोजन स्थल हैं. यहां 180 रुपये में अनलिमिटेड थाली मिलती हैं. बिना प्याज-लहसुन के बने इस भोजन में मिस्सी रोटी, दाल, कढ़ी, आलू की सब्जी, सूखी सब्जी, दही, चावल और सलाद शामिल होता हैं. सात्विक भोजन पसंद करने वालों के लिए यह जगह आदर्श मानी जाती हैं.
ठहरने की व्यवस्था, हर बजट में विकल्प
वृंदावन में ठहरने के लिए कई धर्मशालाएं और होटल उपलब्ध हैं. कम बजट में यात्रा करने वालों को मंदिर से थोड़ी दूरी पर 500 रुपये तक में धर्मशालाओं में कमरा मिल सकता हैं. इसके अलावा मिड और हाई बजट के लिए फेमस होटल भी मौजूद हैं. अगर आप 26 जनवरी के लॉन्ग वीकेंड पर शांति, भक्ति और स्वाद का अनोखा संगम चाहते है तो वृंदावन की यात्रा आपके लिए एक यादगार अनुभव बन सकती हैं. दर्शन, घूमना और लाजवाब खानपान सब कुछ एक ही ट्रिप में.
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