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रांची/डेस्क: विश्व में सबसे अनोखे रिलायन्स फाउंडेशन के पशु बचाव केन्द्र वनतारा के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इसके संरक्षक अनन्त अंबानी को बड़ी राहत दी है. सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के कोल्हापुर से 36 वर्षीय मादा हाथी महादेवी उर्फ माधुरी को वनतारा भेजे जाने का आदेश दे दिया है. कोर्ट ने माधुरी हाथी को वनतारा भेजे जाने की प्रक्रिया सही ठहराते हुए इसकी आगे की कार्रवाई पूरी करने का फैसला दिया है. बता दें कि हाथियों के वनतारा स्थानांतरण को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गयी थी, जिस पर कोर्ट ने अपना फैसला दे दिया है.
बता दें कि कोल्हापुर में एक विवाद के बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था. महादेवी उर्फ माधुरी हथिनी 1992 में कर्नाटक से कोल्हापुर के नांदणी गांव स्थित जैन मठ में लायी गयी थी. इस मठ में हाथी पालने की प्राचीन परम्परा है, जिसे मठ पिछले 700 वर्षों से निभा रहा है. क्योंकि हाथी मठ के धार्मिक कार्यों में शामिल होते हैं. इस बीच माधुरी हथिनी की तबीयत कुछ समय से खराब चल रही थी, जिस पर PETA ने अपनी चिंता व्यक्त की थी और बॉम्बे हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी. 16 जुलाई, 2025 को बॉम्बे हाई कोर्ट ने माधुरी को रिलायंस फाउंडेशन के वनतारा भेजने का आदेश दिया था. इसी आदेश के बाद ही कोल्हापुर में विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ था। 3 अगस्त को नांदणी से कोल्हापुर तक 45 किमी लंबी मौन पदयात्रा की गयी थी, जिसमें में 40,000 से अधिक लोग शामिल हुए थे. बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले के बाद स्थानीय लोगों ने जिओ सिम का प्रयोग भी बंद कर दिया था और कोर्ट के फैसले के खिलाफ राष्ट्रपति को पत्र भी लिखा था. इसी मामले को लेकर एक जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गयी थी, जिस पर कोर्ट ने माधुरी हथिनी को वनतारा स्थानान्तरिक करने का आदेश दिया था.
सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाने से पहले SIT की रिपोर्ट पर गौर किया, उसके बाद ही माधुरी को वनतारा स्थान्तरित करने की इजाजत दी. एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट देते हुए कहा था कि हमारा अनुरोध है कि प्रक्रिया को पशुओं के सर्वोत्तम हित में होने दिया जाना चाहिए.
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