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रांची/डेस्क: श्योपुर, मध्यप्रदेश से मिड-डे मील योजना की एक बेहद शर्मनाक तस्वीर सामने आई है. सरकारी स्कूलों में बच्चों को गंदगी के माहौल में, रद्दी अख़बारों पर खाना परोसा जा रहा है. यह दृश्य न केवल प्रशासन की घोर लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि मासूम बच्चों के अधिकारों का खुला उल्लंघन भी है.
यह विडंबना है कि जिन सरकारी स्कूलों में ज़्यादातर गरीब परिवारों के बच्चे पढ़ते हैं, वहीं उनके साथ सबसे अधिक अन्याय हो रहा है. सरकार चुनाव के समय गरीबों के वोट मांगने के लिए तो बड़े-बड़े वादे करती है, लेकिन उन्हीं के बच्चों को सम्मानजनक तरीके से दो वक्त का भोजन भी नहीं दे पाती.
आज हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि मिड-डे मील योजना का धन ऊपर से नीचे तक भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है. कहीं भोजन बनाया ही नहीं जाता, कहीं बच्चों को अधूरा खाना दिया जाता है, तो कहीं सड़ी-गली सामग्री परोसी जाती है. यह स्थिति व्यवस्था और संवेदनशीलता- दोनों पर गहरे सवाल खड़े करती है.
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