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रांची/डेस्क: देशभर में आज मुसलमान समुदाय बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ ईद-उल-फितर मना रहा हैं. रमजान के पवित्र महीने के रोज़ों के बाद यह दिन भाईचारे, खुशी और दया का प्रतीक माना जाता हैं. लोग सुबह ईद की नमाज अदा करने के लिए मस्जिदों और ईदगाहों में इकट्ठा हुए, गले मिलकर एक-दूसरे को ईद मुबारक कहते है और नए कपड़े पहनते हैं. हर घर में विशेष पकवान तैयार किए जाते है और जरूरतमंदों की मदद के लिए जकात और फितरा दिया जाता हैं.
देशभर में ईद की धूम
ईद का त्योहार सिर्फ परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समाज के हर व्यक्ति को इसमें शामिल होने का संदेश देता हैं. यह दिन गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता करने का अवसर भी हैं. देश के बड़े शहरों जैसे दिल्ली, लखनऊ, हैदराबाद, मुंबई और अन्य इलाकों में मस्जिदों के बाहर जरूरतमंदों को जकात और फितरा बांटा जा रहा हैं.
जकात क्या है?
इस्लाम धर्म में जकात को फर्ज यानी अनिवार्य दान माना गया हैं. यह उस मुस्लिम पर लागू होता है, जिसके पास निश्चित सीमा (निसाब) से अधिक संपत्ति हो. आमतौर पर जकात कुल बचत का 2.5 प्रतिशत होती है और इसे साल में एक बार गरीबों, जरूरतमंदों और समाज के कमजोर वर्ग की मदद के लिए दिया जाता हैं. जकात का उद्देश्य समाज में आर्थिक संतुलन बनाए रखना और सहयोग की भावना बढ़ाना हैं.
फितरा क्या है?
फितरा या सदका-ए-फित्र हर मुसलमान पर अनिवार्य है, चाहे वह अमीर हो या गरीब. इसे ईद की नमाज से पहले दिया जाता है ताकि जरूरतमंद भी त्योहार की खुशियों में शामिल हो सकें. फितरा की राशि आमतौर पर एक व्यक्ति के एक दिन के भोजन के बराबर मानी जाती हैं. भारत में यह लगभग 70 से 150 रुपये या स्थानीय स्थिति के अनुसार अधिक हो सकती हैं.
ईद-उल-फितर पर क्या करें?
- ईद की नमाज पढ़ें: हर मुसलमान को चाहिए कि वह मस्जिद या ईदगाह में जाकर मिलकर ईद की नमाज अदा करें और अल्लाह का शुक्रिया करें.
- आने-जाने का रास्ता बदलें: सुन्नत के अनुसार, ईद की नमाज के लिए जाते समय और वापस आते समय अलग-अलग रास्ता अपनाना अच्छा माना जाता हैं.
- साफ सुथरे और नए कपड़े पहनें: इस दिन साफ-सुथरे होकर, अच्छे कपड़े पहनकर ही नमाज के लिए जाना चाहिए.
- तोहफे और मुबारकबाद दें: ईद उल फितर के दिन अपने परिवार, दोस्तों और रिश्तेदारों को ईद मुबारक' कहें और गले लगाकर एक दूसरे के साथ खुशियां बांटें.
- दुआ और इबादत करें: इस दिन अल्लाह से दुआ करें और ज्यादा से ज्यादा इबादत करें, क्योंकि यह दिन खास बरकत वाला होता हैं.
ईद-उल-फितर के पीछे की कहानी
ईद-उल-फितर की शुरुआत पैगंबर हजरत मुहम्मद ने 624 ईस्वी में मदीना में की थी. यह हिजरत के बाद दूसरा साल था, जब मुसलमानों ने पहला रमजान पूरा किया था. जब वे मदीना पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि लोग दो खास दिनों पर जश्न मनाते हैं. इसके बाद उन्होंने बताया कि मुसलमानों के लिए दो ईद होंगी- ईद-उल-फितर और ईद-उल-अजहा.
Best wishes on Eid-ul-Fitr. May this day further brotherhood and kindness all around. May everyone be happy and healthy.
— Narendra Modi (@narendramodi) March 21, 2026
Eid Mubarak!
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