न्यूज़11 भारत
रांची/डेस्क: आज का दिन भारत के अध्याय में सुनहरे अक्षरों से लिखे जाने वाला पल आया साबित हुआ हैं. 15 साल बाद बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव हुआ हैं. बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने आज राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. शुभेंदु अधिकारी के अलावा दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, निसिथ प्रामाणिक, खुदीराम टुडू और अशोक कीर्तनिया ने भी मंत्री पद की शपथ ली. शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन कोलकाता स्थित ब्रिगेड परेड ग्राउंड में किया गया. इस समारोह में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए.
इसके अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता समेत कई दिग्गत नेता भी इस शपथ ग्रहण समारोह का हिस्सा बने लेकिन इस खास और ऐतिहासिक पलों के बीच एक दिलचस्प वाकया देखने को मिला.
कौन है वो बुजुर्ग शख्स?
प्रधानमंत्री मोदी हमेशा से अपने स्नेह और शालीनता के लिए जाने जाते हैं. उनके इस व्यवहार से हर कोई वाकिफ हैं. बता दें कि, आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे ही मंच पर आए, उन्होंने एक बुजुर्ग शख्स को गले लगाया और फिर उनके पांव छुए. इस दौरान दोनों की आंखें नम हो गई थी. बस फिर क्या था, ये दिलचस्प वाकया सुर्खियों में तब्दील हो गया. जब लोगों ने यह सवाल पूछा कि आखिर ये बुजुर्ग शख्स है कौन, जिन्हें पीएम मोदी ने गले लगाया और उनके पांव छुए तो जवाब काफी हैरान कर देने वाला था.
दरअसल, ये बुजुर्ग व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी के सबसे वरिष्ठ कार्यकर्ताओं में से एक माखनलाल सरकार हैं. माखनलाल सरकार ऐसे व्यक्ति है, जिनका नाम 98 वर्ष की आयु होने के बावजूद आजादी के बाद भारत में राष्ट्रवादी आंदोलन से जुड़े शुरुआती जमीनी कार्यकर्ताओं में गिने जाते हैं.
वर्ष 1952 में वह श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ कश्मीर में तिरंगा फहराने के आंदोलन में शामिल हुए थे. इसी बीच उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था. फिर साल 1980 में बीजेपी के गठन के बाद उन्हें पश्चिम दिनाजपुर, जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग जिलों का संगठन समन्वयक बनाया गया. जहां केवल एक साल के अंदर उन्होंने करीब 10 हजार नए सदस्यों को पार्टी से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई. इसके अलावा साल 1981 से लगातार सात वर्षों तक माखनलाल सरकार ने जिला अध्यक्ष के रूप में काम भी किया हैं. उस दौरन यह एक असाधारण उपलब्धि मानी जाती है क्योंकि बीजेपी नेता किसी एक संगठनात्मक पद पर दो साल से अधिक समय तक नहीं रहते थे.
यह भी पढ़े: रांची में उत्पाद विभाग की बड़ी कार्रवाई, 1000 पेटी अवैध शराब बरामद, एक आरोपी गिरफ्तार