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Jayanti: भारत की पहली महिला शिक्षक ही नहीं, महान समाज सुधारक और महिला मुक्ति की प्रणेता थीं सावित्रीबाई फुले

jayanti भारत की पहली महिला शिक्षक ही नहीं महान समाज सुधारक और महिला मुक्ति की प्रणेता थीं सावित्रीबाई फुले

न्यूज11  भारत

रांची/डेस्क: सावित्रीबाई फुले महान सामाजिक सुधारक, दलित उत्थान और नारी मुक्ति आंदोलन की पहली महिला नेता है. वह भले ही मराठी शिक्षक और कवयित्री थी, लेकिन उनके समाज के प्रति समर्पण और योगदानों को देश के हर राज्य ने सिर माथे पर लिया है. झारखंड समेत देश के अनेक राज्यों में महिला और बालिका शिक्षा की योजनाएं उन्हीं को समर्पित हैं. झारखंड में किशोरियों के लिए जो शिक्षा अभियान चल रहा है, वह सावित्रीबाई फुले के ही नाम पर ही है.

सावित्री देवी उन महान महिला विभूतियों में हैं, जिन्होंने महिलाओं और बालिकाओं को शिक्षित करने के लिए समाज का कड़ा विरोध झेलकर भी अपने अभियान को आगे बढ़ाया. समाज के ठेकेदारों ने उन्हें पत्थर भी मारे लेकिन वह अपने रास्ते से कभी विचलित नहीं हुईं.

सावित्री देवी को भारत की पहली महिला शिक्षक होने का गौरव हासिल है. सावित्रीबाई फुले और उनके पति ज्योतिराव फुले ने 1853 में एक शिक्षा समाज की स्थापना की, जिसमें आस-पास के गांवों में सभी वर्गों की लड़कियों व महिलाओं को शिक्षित करने का काम उन्होंने किया. विरोध तब भी हुआ, लेकिन वह जरा भी विचलित नहीं हुईं. उनका यही मानना था कि वे महिलाओं को भी आत्मसम्मान से जीने का अधिकार है इसीलिए वह इसी उद्देश्य को लेकर बढ़ती रहीं कि महिलाओं को भी  आत्मनिर्भर बनाना है. महिलाएं आत्म निर्भर बनेंगी तभी वे सामाजिक अन्याय से मुक्त हो सकेंगी.


सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को हुआ था। इनके पिता का नाम खन्दोजी नेवसे और माता का नाम लक्ष्मी था। सावित्रीबाई फुले का विवाह 1840 में ज्योतिबा फुले से हुआ था।

आज से 170 साल पहले बालिकाओं के लिये स्कूल खोलना धर्मविरोधी काम माना जाता था, लेकिन यह मुश्किल काम भी उन्होंने कर दिखाया. सावित्रीबाई फुले ने अपने जीवन काल में जो बड़े कार्य किये, उनमें विधवा विवाह करवाना, छुआछूत मिटाना, महिलाओं की मुक्ति और दलित महिलाओं को शिक्षित बनाना रहा है. वह एक कवियत्री भी थीं उन्हें मराठी की आदिकवियत्री कहा जाता है. 
 
समाज की सेवा करते हुए ही 10 मार्च 1897 को प्लेग के कारण सावित्रीबाई फुले का निधन हो गया. उन्होंने पूरा जीवन-दर्शन यही सिखलाता है कि जब तक सांस है, मानव सेवा ही सच्ची सेवा है. तभी तो उन्होंने प्लेग जैसी महामारी में मरीज़ों की सेवा करना नहीं छोड़ा. प्लेग से प्रभावित एक बच्चे की सेवा करते हुए ही उन्हें यह छूत की बीमारी लग गयी थी और इसी कारण से उनकी मृत्यु हुई. 3 जनवरी, 1983 को जन्मी सावित्रीबाई फुले आजीवन जिस सच्ची लगन से समाज, महिला, दलितों, की सेवा कर रहीं, वह अद्वितीय और अनुकरणीय है. जयंती अवसर पर सावित्री देवी को शत-शत नमन!

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