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रांची/डेस्क: जिन कागजी मुद्रा का आप अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल करते हैं, उनको लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है. और यह खबर कहीं और से नहीं, बल्कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से आ रही है. आरबीआई ने कह दिया है जो नोट आप अपनी जेब में लेकर घूमते हैं, वह अब बाजार में नहीं चलेंगे और इसको बंद या समाप्त करने की प्रक्रिया 1 जून से शुरू हो जाएगी.
अगर आरबीआई द्वारा मुद्रित कागजी नोटों का प्रचलन बंद कर देगी तो फिर लोगों के पार विनमय (लेन-देन) का माध्यम क्या रह जाएगा? अभी तक जो खबर है, उसके अनुसार, कागजी मुद्रा के प्रचलन बंद को बंद करने का केन्द्रीय बैंक ने निर्णय लिया, मुद्रा को बंद करने का नहीं. रिजर्व बैंक कागजी नोटों की जगह प्लास्टिक से बने नोट प्रचलन में लाने चाह रही है. आरबीआई के इस निर्णय लेने के पीछे भी वजह है. दरअसल, UPI के माध्यम से ऑनलाइन भुगतान का प्रचलन तो बढ़ा है, इसके बावजूद कैश से लेन-देन कम नहीं हुई है. ऑनलाइन पेमेंट के बावजूद कागजी नोटों का प्रचलन नहीं थमना ही भारतीय रिजर्व बैंक को हैरान कर रहा है. इसीलिए उसने यह निर्णय लिया है कि वह अपने एक पुराने प्रस्ताव को फिर से जीवित करे. और प्रस्ताव है, पॉलीमर यानी प्लास्टिक बैंक नोट.
प्लास्टिक नोटों के प्रचलन से क्या होगा?
खबरों केअनुसार, RBI ने यह महसूस किया है प्लास्टिक के नोटों का प्रचलन सही होगा. हाल में केन्द्रीय रिजर्व बैंक की जो बैठकें हुई हैं, उनमें इस विषय पर काफी चर्चा भी हुई है. काफी सोच समझ कर इस पायलट प्रोजेक्ट को शुरू करने का उसने मन बनाया है. नोटों का स्वरूप बदलने के पीछे कागजी नोटों की उम्र भी रिजर्व बैंक के लिए चिंताजनक है. बार-बार इस्तेमाल होने पर कागजी नोट फट जाते हैं या गंदे हो जाते हैं, जिससे लोग इन्हें लेने में आनाकानी भी करते हैं. ये कटे-फटे और गंदे नोट रिजर्व बैंक के लिए सिरदर्द बन जाते हैं क्योंकि उन्हें फिर से नये नोट छापने पड़ते हैं. RBI के आंकड़ों के अनुसार, वित्तवर्ष 2025 में लगभग 23.8 अरब खराब नोट नष्ट बदलने पड़े. ऐसा हर साल होता है. यह काम सरकार और RBI को काफी महंगा पड़ता है.
आरबीआई छोटे नोटों से करेगा ट्रायल
आरबीआई अपना यह पायलट प्रोजेक्ट छोटे नोटों से शुरू कर सकता है। पहले ₹10 और ₹20 जैसे छोटे नोटों से टेस्टिंग की जाएगी, क्योंकि ये सबसे ज्यादा प्रचलन में भी रहते हैं और जल्दी खराब भी होते हैं. छोटे नोटों के सफल ट्रायल के बाद ही रिजर्व बैंक बड़े नोटों को प्रचलन की तैयारी करेगा. अगर आरबीआई का यह ट्रायल सफल हो जाता है तो निश्चित तौर पर हर साल नोट बदलने में जो अरबों रुपए खर्च करने पड़ते हैं, उसका बोझ कम हो जाएगा. क्योंकि प्लास्टिक नोटों की उम्र कागजी नोटों से निश्चित तौर पर लम्बी होगी. साथ ही उम्मीद है कि नकली नोटों के प्रचलन पर भी लगाम लग सकेगी, क्योंकि प्लास्टिक के नोटों के होलोग्राम की नकल करना मुश्किल होगा.
प्लास्टिक के नोटों की खासियत
प्लास्टिक के नोट पतले फ्लेक्सिबल प्लास्टिक से बने होंगे जिन्हें कागज की तरह मोड़ सकते हैं, लेकिन ये ज्यादा टिकाऊ होंगे और इनके कटने, फटने, पानी में गलने का भय नहीं होगा. जहां, कागज के नोटों की उम्र 1 साल माना जाता है, वहीं, प्लास्टिक नोट 5 साल आराम से चल सकते हैं. सबसे बड़ी बात इसके सुरक्षा फीचर हैं, इनमें मेटामेरिक इंक, माइक्रो-ऑप्टिक होलोग्राम लग सकते हैं.
दुनिया में यहां चल रहे हैं प्लास्टिक के नोट
सबसे पहले इसकी शुरुात ऑस्ट्रेलिया ने 1988 में की थी. वर्तमान में कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, न्यूजीलैंड, वियतनाम, रोमानिया, मालदीव समेत करीब 20 देश इसका इस्तेमाल कर रहे हैं.
कब से हो सकती है प्लास्टिक नोटों की शुरुआत
सोशल मीडिया पर 1 जून से प्लास्टिक नोट की खबरें चल रही हैं, लेकिन RBI या वित्त मंत्रालय की ओर से ऐसी किसी तारीख का ऐलान नहीं किया गया है. अभी यह विचाराधीन जरूर है, लेकिन आरबीआई इसे प्रचलन में लाने के प्रति गंभीर अवश्य है.
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