इन्द्रदेव/न्यूज11 भारत
सहरसा/डेस्क: बिहार के सहरसा जिले में एक बार फिर मध्याह्न भोजन योजना की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. मामला नौहट्टा प्रखंड अंतर्गत मध्य विद्यालय जोड़ी का है, जहां बच्चों ने एनजीओ द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे भोजन का बहिष्कार कर दिया है.
बच्चों का आरोप है कि उन्हें निर्धारित मेन्यू के अनुसार भोजन नहीं दिया जाता और खाने की गुणवत्ता भी बेहद खराब रहती है. छात्रों का कहना है कि कई बार भोजन करने के बाद वे बीमार भी पड़ चुके हैं, जिसके कारण उन्होंने स्कूल का खाना लेने से साफ इनकार कर दिया.
स्थानीय लोगों के अनुसार, नौहट्टा प्रखंड के अधिकांश विद्यालयों में यही स्थिति बनी हुई है. कई बच्चे स्कूल का भोजन खाने के बजाय घर जाकर खाना खाते हैं. पूछने पर वे बताते हैं कि एनजीओ द्वारा दिया जाने वाला भोजन स्वादहीन और निम्न गुणवत्ता का होता है.
मध्य विद्यालय जोड़ी में हालात ऐसे हैं कि प्रतिदिन एनजीओ द्वारा भेजा गया भोजन बच जाता है और उसे फेंकना पड़ता है. बच्चों और अभिभावकों के विरोध के बावजूद भी भोजन लगातार भेजा जा रहा है, जिससे नाराजगी बढ़ती जा रही है.
इस मामले पर एमडीएम प्रभारी (MDP0) उज्ज्वल कुमार ने कहा कि पहली नजर में मेन्यू ही गलत प्रतीत हो रहा है. उन्होंने बताया कि 15 फरवरी 2025 से ही मेन्यू में बदलाव कर दिया गया था, लेकिन विद्यालय स्तर पर उसे लागू नहीं किया गया, जो संदिग्ध है. उन्होंने मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की बात कही.
गौरतलब है कि हाल ही में पतरघट में भी गुणवत्ताहीन मध्याह्न भोजन खाने से लगभग दो दर्जन बच्चे बीमार हो गए थे. लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं से अभिभावकों में चिंता बढ़ गई है.
ग्रामीणों का कहना है कि यह मुद्दा पहले भी उठाया जा चुका है, लेकिन अब तक जिम्मेदार एजेंसियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. ऐसे में मध्याह्न भोजन योजना की निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं.
अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग और प्रशासन इस मामले में क्या ठोस कदम उठाते हैं और बच्चों को सुरक्षित व गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने के लिए क्या कार्रवाई की जाती है.
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