न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क(धीरज कुमार सिंह, जमुई) बिहार के जमुई जिले से भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बहुत बड़ी कार्रवाई सामने आई है. झाझा थाने में तैनात सरकारी वाहन चालक जितेंद्र कुमार को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (विजिलेंस) की टीम ने ₹12,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया. इस सनसनीखेज कार्रवाई के दौरान सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब झाझा थाना प्रभारी के मौके से अचानक गायब (फरार) होने की खबर जंगल की आग की तरह फैल गई. इस चर्चा के बाद पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है.
बालू के अवैध खेल में हर दिन का 'टैक्स': प्रति ट्रैक्टर ₹3,000 की डिमांड
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इलाके में बालू के अवैध उठाव और परिवहन को बेधड़क चलाने के लिए ट्रैक्टर चालकों और बालू माफियाओं से मोटी रकम वसूली जा रही थी. झाझा थाने के नाम पर हर एक ट्रैक्टर से प्रतिदिन ₹3,000 का 'अवैध टैक्स' वसूला जाता था. इसी सिंडिकेट और घूसखोरी की पुख्ता शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने अपना जाल बिछाया और घूस की रकम लेते ही ड्राइवर को रंगे हाथों दबोच लिया.
सर्किट हाउस में कड़ाई से पूछताछ, पूरे सिंडिकेट पर नजर
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गिरफ्तार चालक से पूछताछ: विजिलेंस की टीम फिलहाल गिरफ्तार चालक जितेंद्र कुमार को जमुई सर्किट हाउस ले गई है, जहाँ बंद कमरे में उससे कड़ाई से पूछताछ की जा रही है.
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थाना प्रभारी की भूमिका: रेड के दौरान थाना प्रभारी के अचानक गायब हो जाने की बात ने इस पूरे मामले में उनकी संलिप्तता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
निगरानी खंगाल रही है रिश्वत का पूरा नेटवर्क
निगरानी विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यह केवल एक ड्राइवर का निजी खेल नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बहुत बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था.
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बड़े चेहरों पर शिकंजा: विभाग अब इस बात की गहराई से जांच कर रहा है कि बालू कारोबारियों से वसूली जाने वाली इस काली कमाई का हिस्सा और किन-किन बड़े अधिकारियों तक पहुंचता था.
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अधिकारियों की लिस्ट तैयार: अवैध वसूली में शामिल अन्य पुलिसकर्मियों और बिचौलियों की भूमिका की जांच के लिए विजिलेंस ने अपनी तकनीकी टीम को भी एक्टिव कर दिया है, ताकि पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया जा सके.