न्यूज 11 भारत बिहार डेस्क
अश्मित सिन्हा | राजनीतिक रिपोर्ट / पटना : झारखंड की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी तनाव देखने को मिल रहा है। सत्ताधारी गठबंधन को लेकर जारी बयानबाज़ी ने माहौल को गरमा दिया है। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव का झारखंड दौरा चर्चा में है।
सवाल उठ रहा है कि क्या तेजस्वी यादव का रांची दौरा सिर्फ संगठनात्मक कार्यक्रम है या फिर बढ़ते सियासी तनाव को संभालने की कोशिश? आईये जानते हैं अंदर का पूरा मामला-
हाईलाइट्स -
- झारखंड में गठबंधन की राजनीति को लेकर बयानबाज़ी तेज, सियासी माहौल गरमाया।
- Tejashwi Yadav के रांची दौरे पर राजनीतिक अटकलें तेज।
- सियासी जानकारों का दावा—जून-जुलाई में झारखंड में बड़ा उलटफेर संभव।
- भाजपा और विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी।
- झारखंड की स्थिति का असर बिहार की राजनीति पर भी पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
सियासी बयानबाज़ी से बढ़ा तनाव
झारखंड में गठबंधन की राजनीति पर पूर्व विधायक सरयू राय के बयान के बाद हलचल तेज हो गई है। उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा को कांग्रेस और राजद से दूरी बनाने की सलाह दी है। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि जून-जुलाई के आसपास झारखंड में बड़ा सियासी उलटफेर संभव है। कयास यह भी लगाए जा रहे हैं कि अगर गठबंधन में दरार पड़ती है तो एनडीए के लिए सत्ता समीकरण बन सकता है।
राजद का पलटवार
राजद ने इन अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि झारखंड में गठबंधन पूरी तरह मजबूत है और यह विकास व साझा विचारधारा पर आधारित है।
“भाजपा केवल भ्रम फैलाने का काम कर रही है। झारखंड में गठबंधन पूरी तरह एकजुट है और किसी तरह की टूट की कोई संभावना नहीं है।”- एजाज अहमद ( राजद )
भाजपा का हमला
भाजपा ने तेजस्वी यादव के रांची दौरे को राजनीतिक दबाव में लिया गया कदम बताया है।
“जब सहयोगी दलों में भरोसा कम होने लगता है, तब ऐसे दौरे शुरू होते हैं। झारखंड में जनता बदलाव चाहती है और माहौल एनडीए के पक्ष में बन रहा है।”- प्रभाकर मिश्रा ( (BJP )
कांग्रेस का जवाब
कांग्रेस ने इन तमाम अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि यह पूरी तरह राजनीतिक प्रचार है।
“इन बयानों में कोई सच्चाई नहीं है। भाजपा और उसके सहयोगी दल केवल भ्रम की राजनीति कर रहे हैं। गठबंधन पूरी तरह मजबूत है।”- डॉ. स्नेहाशीष वर्धन ( कांग्रेस )
जेडीयू का तंज
जेडीयू ने राजद की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि झारखंड में उनकी राजनीतिक पकड़ बेहद कमजोर है।
“राजद के पास झारखंड में सीमित जनाधार है। ऐसे में वहां उनका प्रभाव बढ़ा-चढ़ाकर बताया जा रहा है।”- अकबर अली ( JDU )
जानकारों का मानना है कि झारखंड में अगर गठबंधन समीकरण बदलता है तो इसका असर बिहार की राजनीति पर भी पड़ सकता है। हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाले गठबंधन की स्थिरता को लेकर उठ रहे सवाल आने वाले दिनों में और तेज हो सकते हैं।
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