न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
नमो नारायण मिश्रा / गोपालगंज - गोपालगंज जिले के हथुआ स्थित जीएनएम नर्सिंग कॉलेज से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां छात्राओं के लिए पढ़ाई के दौरान शादी करने पर सख्त रोक लगा दी गई है। कॉलेज प्रशासन ने साफ तौर पर निर्देश जारी किया है कि अगर कोई छात्रा कोर्स के दौरान शादी करती है, तो उसका नामांकन रद्द कर दिया जाएगा। इस आदेश का नोटिस कॉलेज परिसर की दीवारों पर चस्पा किया गया है, जिसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।
शादी की तो खत्म होगी पढ़ाई
जारी नोटिस के अनुसार, जीएनएम और एएनएम कोर्स में पढ़ाई कर रही छात्राओं को तीन साल की पढ़ाई पूरी होने तक शादी नहीं करने की शर्त माननी होगी। अगर कोई छात्रा इस नियम का उल्लंघन करती है, तो उसका एडमिशन तत्काल प्रभाव से रद्द किया जा सकता है। इस फैसले ने छात्राओं के बीच असमंजस और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है।
प्रशासन का तर्क: पढ़ाई प्रभावित होगी
कॉलेज की प्राचार्या मानसी सिंह का कहना है कि यह फैसला व्यक्तिगत नहीं बल्कि विभागीय निर्देश के तहत लिया गया है। उन्होंने बताया कि नर्सिंग कोर्स पूरी तरह आवासीय होता है, जिसमें छात्राओं को हॉस्टल में रहकर नियमित प्रशिक्षण लेना पड़ता है। ऐसे में शादी होने पर पढ़ाई और ट्रेनिंग प्रभावित होने की संभावना रहती है। इसी कारण नामांकन के समय ही छात्राओं से एक घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर कराए जाते हैं।
ANM-GNM दोनों कोर्स में लागू नियम
बताया जा रहा है कि यह नियम सिर्फ जीएनएम ही नहीं, बल्कि एएनएम पाठ्यक्रमों में भी लागू है। यानी नर्सिंग से जुड़े सभी आवासीय कोर्स में पढ़ाई के दौरान शादी पर प्रतिबंध रहेगा।
वायरल नोटिस पर प्रशासन सख्त
मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया है। गोपालगंज के डीएम पवन कुमार सिन्हा ने पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने हथुआ एसडीएम को 24 घंटे के भीतर जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। डीएम ने कहा है कि रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
छात्राओं में उठ रहे सवाल
इस फैसले के बाद छात्राओं के बीच बहस छिड़ गई है। कुछ इसे पढ़ाई के लिए जरूरी अनुशासन बता रही हैं, तो कुछ इसे व्यक्तिगत अधिकारों में हस्तक्षेप मान रही हैं। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी शैक्षणिक संस्थान को इस तरह का नियम लागू करने का अधिकार है। फिलहाल, पूरे मामले पर सबकी नजर प्रशासन की जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे यह साफ हो सकेगा कि यह नियम कितना वैध है और आगे क्या कार्रवाई होगी।
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