Karma Puja 2026
एक्सक्लूसिव

कर्मा पूजा क्यों मनाई जाती है? जानें इस दिन का महत्तव और घर में बनने वाले पकवान

झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़ और आसपास के कई इलाकों में कर्मा पूजा का खास महत्व है. इस दिन खास तौर पर कर्म वृक्ष की पूजा की जाती है.

By : Amisha Pathak
कर्मा पूजा क्यों मनाई जाती है? जानें इस दिन का महत्तव और घर में बनने वाले पकवान

न्यूज़11 भारत

लाइफस्टाइल/डेस्क: झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़ और आसपास के कई इलाकों में कर्मा पूजा का खास महत्व है. यह सिर्फ एक धार्मिक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति, पेड़-पौधे और भाई-बहनों के रिश्ते से जुड़ी लोक परंपरा भी है. इस दिन खास तौर पर कर्म वृक्ष की पूजा की जाती है. मान्यता है कि कर्म देवता की पूजा करने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है और भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम बना रहता है.

क्यों मनाई जाती है कर्मा पूजा? 

कर्मा पूजा भाद्रपद महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है, जिसे कर्मा या करमा एकादशी भी कहा जाता है. इस दिन कर्म वृक्ष की डाल या पौधे को पूजा स्थल पर स्थापित कर उसकी पूरे विधि-विधान के साथ पूजा की जाती है. पूजा में व्रत रखने वाले अपने परिवार की खुशहाली और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं.

कर्मा पर्व का संबंध आदिवासी और ग्रामीण जीवन से जुड़ा हुआ है. खेती और किसानी पर निर्भर समाज में प्रकृति और पेड़-पौधों को जीवन का आधार माना जाता है. और इसलिए भी इस त्योहार में प्रकृति के प्रति सम्मान भी देखने को मिलता है. पूजा के बाद लोग पारंपरिक कर्मा गीत गाते हैं और मांदर जैसे लोक वाध यंत्रों के साथ नृत्य करते हैं. इस पर्व का उत्साह खासकर झारखंड में अलग ही नजर आता है.

कर्मा पूजा पर कौन- सा खास पकवान बनता है?

इस पर्व में पूजा- पाठ का तो महत्व है ही, लेकिन इसके अलावा कर्मा पूजा में बनाए गए पकवान का भी खास महत्व है. हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में पकवानों की परंपरा थोड़ी अलग हो सकती है. आमतौर पर इस दिन चावल, दाल, सब्जियां और स्थानीय अनाज से बने व्यंजन तैयार किए जाते हैं. वहीं, कई घरों में अरसा रोटी, ठेकुआ, खीर और तरह-तरह के पकवान भी बनाए जाते हैं. बात करें, झारखंड के ग्रामीण इलाकों कि तो वहां स्थानीय फसलों और उपलब्ध सामग्री से बने पारंपरिक भोजन को प्राथमिकता दी जाती है. पूजा के बाद प्रसाद के रूप में इन चीजों को परिवार और आसपास के लोगों के साथ बांटने की परंपरा भी कई जगह देखने को मिलती है.

गीत और नृत्य के बिना अधूरा है यह कर्मा पर्व

इस पर्व की सबसे खास बात यह है कि इस दिन सभी लोग साथ मिलकर कर्मा का गीत गाते हैं. वहीं, महिलाएं और युवतियां इन पारंपरिक गीतों पर नृत्य करती हैं, महिलाओं के साथ पुरुष भी इस उत्सव में सामान्य रूप से शामिल होते हैं. इस तरह यह त्योहार धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामुदायिक मेल-जोल और लोक संस्कृति को भी जीवित रखने का काम करता है.

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