न्यूज 11 भारत/बिहार डेस्क
सरफराज आलम/लखीसराय: नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में हुई मूसलाधार बारिश और बांधों से छोड़े गए पानी ने बिहार में तबाही का मंज़र खड़ा कर दिया है। उफान मारती गंगा नदी राज्य भर में खतरे के निशान को पार कर चुकी है। सबसे डरावनी और खौफनाक स्थिति लखीसराय जिले से सामने आ रही है, जहाँ गंगा, किऊल और हरूहर नदी के एक साथ विकराल रूप धारण करने से स्थिति पूरी तरह बेकाबू हो चुकी है। निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घुस चुका है और हजारों की आबादी अपने ही घरों में 'जलकैदी' बन गई है। पिपरिया दियारा और बड़हिया टाल का संपर्क टूटा। बाढ़ की सबसे भीषण मार लखीसराय के पिपरिया और बड़हिया टाल इलाकों पर पड़ी है।
संपर्क पूरी तरह ठप:
मुख्य मार्ग और संपर्क सड़कें कई फीट पानी में डूब चुके हैं, जिससे दियारा क्षेत्र का जिला मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह कट गया है।
जान जोखिम में डालने को मजबूर: नावों की भारी कमी के कारण लोग तेज बहाव और जलभराव के बीच पैदल या जर्जर देसी नावों के सहारे अपनी जान जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे हैं।
पलायन की मजबूरी:
गांवों और रिहायशी बस्तियों में पानी भर जाने से सैकड़ों परिवार अपना घर-बार छोड़कर ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं।
अंधेरे में डूबे गांव, पीने के पानी और फसलों की भारी तबाही।
बढ़ते जलस्तर ने जनजीवन को पूरी तरह पटरी से उतार दिया है:
दिन-रात बढ़ता जलस्तर अब दहशत पैदा कर रहा है। रात भर लोगों की आंखों में खौफ का साया रहता है कि कहीं पानी और ऊपर न चढ़ जाए।"
प्रशासन के दावे 'नाकाफी', आक्रोश में ग्रामीण
बाढ़ पीड़ितों का आरोप है कि सरकारी राहत और बचाव कार्य महज कागजों तक सीमित हैं। नाकाफी नावें, राहत सामग्री की घोर किल्लत और सुरक्षित आश्रय स्थलों के अभाव के कारण प्रभावित ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है।
मौसम विभाग और जल संसाधन विभाग की चेतावनी ने चिंता और बढ़ा दी है—यदि नदियों का जलस्तर जल्द नहीं घटा, तो स्थिति और भी विकराल रूप ले सकती है। बेबस नागरिक अब सरकार और जिला प्रशासन से त्वरित मदद की गुहार लगा रहे हैं।