न्यूज11 भारत / पटना डेस्क: डिजिटल युग में अपनी अटेंडेंस को 'स्मार्ट' तरीके से मैनेज करने की कोशिश बांका के 19 शिक्षकों को भारी पड़ गई है। स्कूल से नदारद रहकर ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर हाजिरी दर्ज कराने वाले इन शिक्षकों को विभाग ने रंगे हाथों पकड़ा है। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) संजय कुमार यादव ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी पर कार्रवाई शुरू कर दी है।
कहां थे गुरुजी? लोकेशन ने खोली पोल
विभाग की ओर से की गई तकनीकी जांच में यह खुलासा हुआ कि ये सभी शिक्षक अपनी ड्यूटी के दौरान स्कूल परिसर में नहीं, बल्कि जिले की भौगोलिक सीमा से कोसों दूर थे। बावजूद इसके, इन्होंने पोर्टल पर अपनी मौजूदगी दर्ज कर ली। विभाग ने इसे न केवल समय की बर्बादी, बल्कि सरकारी काम में बड़ी धोखाधड़ी और गंभीर अनैतिकता माना है।
'रिपीट' करने वालों पर विभाग की पैनी नजर
जांच में कुछ ऐसे नाम भी सामने आए हैं, जो इस 'खेल' में आदतन अपराधी निकले हैं। शंभूगंज की शिक्षिका कुमुद कुमारी ने तो हद ही कर दी—उन्हें 25, 28 और 30 मार्च को लगातार तीन बार जिले से बाहर पाया गया। ठीक वैसा ही मामला धोरैया की सरिता कुमारी का है, जो दो बार पकड़ी गई हैं। विभाग ने अब यह साफ कर दिया है कि यह महज एक भूल नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश है।
वेतन बंद, जवाब तलब
डीपीओ स्थापना ने कड़ा रुख अपनाते हुए आदेश जारी किया है कि जब तक इन शिक्षकों का स्पष्टीकरण विभाग को नहीं मिलता, तब तक जिस दिन इन्होंने गड़बड़ी की, उस दिन का वेतन रोक दिया जाएगा। सभी 19 शिक्षकों को सात दिनों की मोहलत दी गई है। अगर इस दौरान कोई संतोषजनक साक्ष्य पेश नहीं किया गया, तो विभाग वेतन काटने के साथ-साथ कड़ी विभागीय सजा भी देगा।
कार्रवाई के दायरे में ये प्रखंड:
इस धांधली में शंभूगंज, धोरैया, चांदन, बांका, रजौन, बाराहाट और बेलहर प्रखंडों के शिक्षक शामिल हैं। इसमें संतोष कुमार, कृष्णा कुमार हांसदा, सौरव कुमार, मो. सद्दाम हुसैन, रश्मि रानी और रानी कुमारी समेत 19 नाम प्रमुखता से शामिल हैं।
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