न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क : बिहार पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में जांच अब अहम और निर्णायक चरण में पहुंचती दिख रही है। इस बहुचर्चित प्रकरण में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने पूर्व डीजीपी एसके सिंघल से विस्तृत जवाब मांगा है, जिससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि जांच का दायरा अब शीर्ष स्तर तक बढ़ चुका है।
जांच में सामने आईं गंभीर खामियां
ईओयू सूत्रों के अनुसार, अब तक की जांच के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई है। इस रिपोर्ट में परीक्षा प्रक्रिया के कई महत्वपूर्ण चरणों में गंभीर खामियां उजागर हुई हैं। एजेंसी चयन से लेकर परीक्षा संचालन और प्रश्न-पत्र की सुरक्षा व्यवस्था तक, हर स्तर पर लापरवाही के संकेत मिले हैं। अधिकारियों का मानना है कि यदि तय प्रक्रियाओं का सही तरीके से पालन होता, तो इतनी बड़ी गड़बड़ी को रोका जा सकता था।
एसके सिंघल से पूछे गए अहम सवाल
तत्कालीन केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती) के अध्यक्ष रहे एसके सिंघल को ईओयू की ओर से कई बिंदुओं पर सिलसिलेवार सवाल भेजे गए हैं। इन सवालों में एजेंसी के चयन की प्रक्रिया, प्रश्न-पत्र की छपाई, पैकेजिंग, ट्रांसपोर्टेशन और वितरण प्रणाली शामिल हैं। उनसे इन सभी पहलुओं पर स्पष्ट और विस्तृत जवाब मांगा गया है। हालांकि, खबर लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
जवाब के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई
जांच अधिकारियों के मुताबिक, सिंघल के जवाब के बाद ही जांच की अगली दिशा तय की जाएगी। यदि उनके जवाब में लापरवाही या अनियमितता के संकेत मिलते हैं, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई संभव है। ईओयू इस मामले में हर कड़ी को जोड़ते हुए दोषियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
1 अक्टूबर 2023 की परीक्षा हुई थी रद्द
गौरतलब है कि बिहार पुलिस में 21 हजार से अधिक सिपाही पदों के लिए 1 अक्टूबर 2023 को परीक्षा आयोजित की गई थी। पेपर लीक की पुष्टि के बाद परीक्षा को रद्द कर दिया गया, जिससे लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया था। इस घटना के बाद राज्यभर में व्यापक आक्रोश और विरोध प्रदर्शन देखने को मिला था।
संजीव मुखिया गिरोह की भूमिका उजागर
जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि इस पूरे मामले में संजीव मुखिया गिरोह की अहम भूमिका रही है। ईओयू के अनुसार, परीक्षा से करीब चार दिन पहले ही प्रश्न-पत्र को सिस्टम से गायब कर लिया गया था, जो अंदरूनी मिलीभगत की ओर इशारा करता है। आरोप है कि गिरोह ने पेपर लीक कर अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूली।
SOP की अनदेखी से कमजोर हुआ सिस्टम
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि प्रश्न-पत्र और अन्य गोपनीय सामग्री के परिवहन के दौरान तय मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का पालन नहीं किया गया। प्रेस से जिला कोषागार तक पेपर ले जाने की प्रक्रिया में कई स्तरों पर लापरवाही बरती गई, जिससे सुरक्षा व्यवस्था कमजोर पड़ी और आरोपियों को साजिश को अंजाम देने का मौका मिला।
21 आरोपी गिरफ्तार, कई से पूछताछ जारी
अब तक इस मामले में 21 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि कई अन्य संदिग्धों से पूछताछ जारी है। ईओयू ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। केंद्रीय चयन पर्षद के कुछ पदाधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। हम आपको बता दें कि राज्य सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
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