न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
पटना - बिहार में सड़क और कनेक्टिविटी को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो चुकी है। राज्य सरकार अब गंगा तट के सहारे बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने जा रही है। इसके तहत तीन नई फोर लेन सड़कें और सोन नदी पर एक नए पुल का निर्माण प्रस्तावित है। करीब 5500 करोड़ रुपये की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य पटना समेत पश्चिमी बिहार के कई जिलों की आवाजाही को तेज और सुगम बनाना है। सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद लोगों को लंबे ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी और यात्रा का समय भी काफी कम होगा।
हाईलाइट्स -
- गंगा किनारे बिहार में तीन नई फोर लेन सड़कों की तैयारी
- मनेर से बक्सर तक बनेगा 90 KM लंबा विश्वामित्र पथ
- सोन नदी पर नए पुल का भी प्रस्ताव, सर्वे प्रक्रिया शुरू
- गंगा-अंबिका पथ और नारायणी पथ से बढ़ेगी कनेक्टिविटी
- करीब 5500 करोड़ रुपये की लागत से विकसित होंगी परियोजनाएं
- अगले चार वर्षों में निर्माण पूरा करने का लक्ष्य
मनेर से बक्सर तक बनेगा ‘विश्वामित्र पथ’
इन परियोजनाओं में सबसे अहम “विश्वामित्र पथ” को माना जा रहा है। यह सड़क मनेर से बक्सर तक करीब 90 किलोमीटर लंबाई में विकसित की जाएगी। खास बात यह है कि यह फोर लेन सड़क गंगा किनारे बने तटबंध के सहारे तैयार होगी। जहां पहले से बांध मौजूद नहीं हैं, वहां नए बांध बनाकर सड़क निर्माण किया जाएगा। सरकार इसे पटना और बक्सर के बीच एक मजबूत वैकल्पिक मार्ग के रूप में विकसित करना चाहती है, जिससे एनएच पर दबाव कम हो सके।
यह सड़क पूरी तरह एट-ग्रेड होगी, यानी इसे जमीन के स्तर पर बनाया जाएगा। इसी परियोजना के तहत सोन नदी पर नए पुल के निर्माण की भी योजना है। बिहार राज्य पथ विकास निगम ने इसके लिए सर्वे एजेंसी चुनने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। 27 मई को प्री-बिड मीटिंग आयोजित होगी, जबकि 10 जून तक एजेंसी चयन का लक्ष्य रखा गया है। चयनित एजेंसी को छह महीने के भीतर सर्वे और डीपीआर तैयार करनी होगी।
गंगा किनारे बनेंगे तीन नए कॉरिडोर
सरकार विश्वामित्र पथ के अलावा दो और बड़े सड़क कॉरिडोर विकसित करने की तैयारी में है। इनमें “गंगा-अंबिका पथ” और “नारायणी पथ” शामिल हैं। गंगा-अंबिका पथ करीब 56 किलोमीटर लंबा होगा, जो बिदुपुर से दिघवारा तक बनेगा। वहीं नारायणी पथ लगभग 73.51 किलोमीटर में गोपालगंज के दरिहारा से डुमरिया घाट तक तैयार किया जाएगा। इन सड़कों के जरिए गंगा किनारे बसे जिलों को तेज और बेहतर सड़क संपर्क मिलेगा।
सरकार इन सभी परियोजनाओं को पीपीपी मॉडल पर विकसित करने की योजना बना रही है। यानी निजी कंपनियां निर्माण में निवेश करेंगी और बाद में टोल के जरिए लागत की भरपाई करेंगी। माना जा रहा है कि इन परियोजनाओं से व्यापार, पर्यटन और स्थानीय परिवहन व्यवस्था को बड़ा फायदा मिलेगा।
जेपी गंगा पथ फेज-2 का काम भी तेज
इधर जेपी गंगा पथ फेज-2 परियोजना पर भी तेजी से काम चल रहा है। यह सड़क दीघा से कोईलवर तक करीब 35.65 किलोमीटर लंबाई में बनाई जा रही है। इसमें दीघा से शेरपुर तक एलिवेटेड फोर लेन सड़क बनेगी, जबकि शेरपुर से कोईलवर तक एट-ग्रेड फोर लेन मार्ग तैयार होगा। यह परियोजना पटना और भोजपुर के बीच यातायात को काफी आसान बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।
कुल मिलाकर सरकार का लक्ष्य अगले चार वर्षों में इन सभी परियोजनाओं को पूरा करना है। यदि योजनाएं तय समय पर पूरी होती हैं, तो बिहार में सड़क नेटवर्क को नई मजबूती मिलेगी और पटना से पश्चिमी जिलों तक सफर पहले के मुकाबले कहीं अधिक आसान और तेज हो जाएगा।
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