न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
अविनाश श्रीवास्तव / रोहतास - रोहतास जिले के डेहरी में रहने वाले इंजीनियर जमील अख्तर ने अपनी जिंदगी का मकसद ही शिक्षा दान को बना लिया है। गरीब बच्चों को पढ़ाने की ऐसी लगन कि उन्होंने शादी तक नहीं की और अपना पूरा जीवन समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया।
हाईलाइट्स :
- एनटीपीसी के डीजीएम जमील अख्तर ने शादी तक नहीं की
- 500 से ज्यादा गरीब बच्चों को दे रहे मुफ्त शिक्षा
- डेहरी में “ग्लोबल पब्लिक” स्कूल का संचालन
- 19 शिक्षकों का वेतन खुद उठाते हैं
- 2015 से लगातार समाज सेवा में जुटे
- 500 बच्चों के लिए उम्मीद की किरण
आज के दौर में जहां शिक्षा महंगी होती जा रही है, वहीं जमील अख्तर 500 से ज्यादा गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा दे रहे हैं। उनके इस प्रयास से उन परिवारों को राहत मिली है, जो फीस और किताबों के खर्च के कारण बच्चों को स्कूल नहीं भेज पाते।
‘ग्लोबल पब्लिक’ स्कूल में मुफ्त पढ़ाई
डेहरी के बारह पत्थर मोहल्ला स्थित “ग्लोबल पब्लिक” स्कूल में कक्षा 1 से 8 तक बच्चों को निशुल्क शिक्षा दी जाती है। यहां बच्चों से कोई फीस नहीं ली जाती और किताबें भी बेहद कम कीमत पर उपलब्ध कराई जाती हैं।
अपने वेतन से चलाते हैं पूरा स्कूल
एनटीपीसी औरंगाबाद में डीजीएम पद पर कार्यरत जमील अख्तर अपने वेतन का बड़ा हिस्सा इस स्कूल पर खर्च करते हैं। स्कूल में कार्यरत 19 शिक्षकों और कर्मचारियों का वेतन भी वही देते हैं, जिनमें 15 महिला और 4 पुरुष शिक्षक शामिल हैं।
समाज के लिए प्रेरणा बने जमील अख्तर
जमील अख्तर का मानना है कि शिक्षा सबसे बड़ा दान है। उनके इस प्रयास को स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी सराहा है और उन्हें सम्मानित किया गया है। उनका यह काम न सिर्फ बच्चों का भविष्य संवार रहा है, बल्कि समाज को भी एक नई दिशा दे रहा है।
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