न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
पटना - बिहार सरकार ने ट्रैफिक जाम के कारण एंबुलेंस के फंसने और मरीजों की मौत की घटनाओं पर कड़ा कदम उठाया है। निर्देश जारी किए गए हैं कि किसी भी हालत में एंबुलेंस को जाम में नहीं रुकना चाहिए। अगर ऐसा पाया गया तो मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय होगी और उन पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि मरीज की जान बचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी।
हाईलाइट्स -
- एंबुलेंस को जाम में फंसने से रोकने के लिए सरकार का सख्त निर्देश
- अस्पतालों के मुख्य गेट से 100 मीटर तक ‘जीरो टॉलरेंस जोन’ लागू
- सीसीटीवी से एंबुलेंस की आवाजाही पर 24 घंटे निगरानी
अस्पतालों के आसपास विशेष व्यवस्था
भागलपुर के मायागंज अस्पताल की रिपोर्ट में सामने आया कि पिछले छह महीनों में 15–20 मरीज समय पर इलाज न मिलने के कारण दम तोड़ चुके हैं। इसी को देखते हुए सरकार ने बड़े अस्पतालों के मुख्य गेट से 100 मीटर के दायरे को जीरो टॉलरेंस जोन घोषित किया है। इस क्षेत्र में ऑटो, ई-रिक्शा और अन्य वाहनों की अवैध पार्किंग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी ताकि एंबुलेंस को आसानी से प्रवेश मिल सके।
तकनीक और निगरानी की मदद
स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत लगाए गए हाईटेक सीसीटीवी कैमरों से एंबुलेंस की आवाजाही पर 24 घंटे नजर रखी जाएगी। जहां भी एंबुलेंस को बाधा मिलेगी, वहां तुरंत ट्रैफिक पुलिस और प्रशासन को अलर्ट किया जाएगा। भागलपुर के एसएसपी प्रमोद कुमार यादव ने स्पष्ट किया है कि सायरन सुनते ही रास्ता खाली कराया जाए और लापरवाही करने वाले पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई होगी। इस कदम से उम्मीद है कि गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में मदद मिलेगी और कई जिंदगियां बचाई जा सकेंगी।
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