न्यूज 11 भारत/बिहार डेस्क
रमण कुमार/मधेपुरा: दिल्ली में रोजी-रोटी की तलाश में गए मधेपुरा के एक युवा मजदूर की जिंदगी महज 21 साल की उम्र में एक दर्दनाक हादसे में खत्म हो गई। घर से बेहतर भविष्य का सपना लेकर दिल्ली गया युवक अब ताबूत में अपने गांव लौटा है। हादसे के बाद मधेपुरा के घैलाढ़ थाना क्षेत्र के अरहा महुआ पंचायत के वार्ड संख्या 14 में मातम पसरा हुआ है।
मृतक की पहचान उमेश यादव के 21 वर्षीय पुत्र पांडव उर्फ सेंटू कुमार के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि सेंटू कुमार मजदूरी करने के लिए दिल्ली गया था। उसके साथ उसकी पत्नी और दो छोटे-छोटे बच्चे भी पीछे रह गए हैं। मृतक की एक करीब एक साल की बेटी और लगभग आठ महीने का दुधमुंहा बेटा है।
परिजनों के मुताबिक, गांव के ही संवेदक और ठेकेदार राजकुमार यादव, जो मिसरी उर्फ रमेश यादव के पुत्र बताए जाते हैं, पांडव उर्फ सेंटू कुमार को मजदूरी कराने के लिए दिल्ली लेकर गए थे। बताया गया है कि दिल्ली के महपालपुर एयरपोर्ट के समीप अहलुवालिया कॉन्ट्रैक्ट्स इंडिया लिमिटेड के कार्यस्थल पर एंजेलिका एरोसिटी वर्क्स के माध्यम से सरिया बांधने का काम कराया जा रहा था। संबंधित कार्य का आईडी नंबर 6666000000049973 बताया गया है।
परिजनों के अनुसार, 4 सितंबर 2026 को सेंटू कुमार काम पर था। इसी दौरान हाइड्रा मशीन की मदद से सरिया का एक भारी बंडल ऊपर ले जाया जा रहा था। अचानक बंडल को बांधने वाला बेल्ट टूट गया और देखते ही देखते भारी-भरकम सरिया नीचे आ गिरा।
बताया जा रहा है कि सरिया का बंडल सीधे पांडव उर्फ सेंटू कुमार के शरीर पर जा गिरा। हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गया। आनन-फानन में उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं सके और उसे मृत घोषित कर दिया गया।
हादसे की खबर के बाद मृतक के गांव और परिवार में कोहराम मच गया। लेकिन इसी बीच मृतक की पत्नी ने ठेकेदार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मृतक की पत्नी का आरोप है कि हादसे के बाद उन्हें पति की मौत की वास्तविक जानकारी नहीं दी गई। पत्नी के मुताबिक, उन्हें बताया गया कि सेंटू घायल है और अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है। लेकिन बाद में किसी माध्यम से उन्हें पता चला कि उनके पति की ड्यूटी के दौरान ही मौत हो चुकी है। इसके बाद परिवार के लोगों को दिल्ली भेजा गया। परिजनों के दिल्ली पहुंचने के बाद शव को आज गांव लाया गया। गांव में शव पहुंचते ही पुरा गांव मातम में छा गया।
परिवार का आरोप है कि अगर उन्हें समय पर घटना की सही जानकारी दी जाती तो वे पहले ही दिल्ली पहुंचकर स्थिति की जानकारी ले सकते थे। परिजनों ने ठेकेदार पर परिवार को गुमराह करने का आरोप लगाया है।परिजनों का यह भी आरोप है कि हादसे के बाद मृतक के परिवार को ठेकेदार की ओर से किसी तरह की आर्थिक सहायता नहीं दी गई। हालांकि, इन आरोपों पर ठेकेदार या संबंधित कंपनी का पक्ष अभी सामने नहीं आया है।
हादसे ने निर्माण स्थल पर मजदूरों की सुरक्षा को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक के परिजनों का आरोप है कि कार्यस्थल पर मजदूरों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए थे।
परिवार का कहना है कि अगर काम के दौरान सुरक्षा मानकों का सही तरीके से पालन किया गया होता, सरिया के बंडल को सुरक्षित तरीके से उठाया गया होता और मजदूरों की सुरक्षा का पर्याप्त इंतजाम होता, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था। एक तरफ परिवार अपने जवान बेटे को खोने के गम में डूबा है, तो दूसरी तरफ मृतक की पत्नी के सामने अब दो छोटे बच्चों के पालन-पोषण की बड़ी जिम्मेदारी आ गई है।
जिस बच्चे की उम्र अभी दुनिया को समझने की भी नहीं हुई, उसके सिर से पिता का साया उठ गया। करीब एक साल की बेटी और आठ महीने के दुधमुंहे बेटे की जिम्मेदारी अब परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर खड़ी है। मृतक के माता-पिता, पत्नी, दादा-दादी और परिवार के अन्य सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में भी शोक का माहौल है। परिजन इस हादसे की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
परिवार की मांग है कि दिल्ली स्थित कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों की जांच की जाए। यह पता लगाया जाए कि सरिया का बंडल किस परिस्थिति में गिरा, बेल्ट क्यों टूटा और उस समय मजदूरों की सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए गए थे। परिजनों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई करने और मृतक के आश्रितों को उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है।
परिवार यह भी चाहता है कि निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदार और अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच हो, ताकि हादसे की वास्तविक वजह सामने आ सके। फिलहाल इस पूरे मामले में ठेकेदार और संबंधित कंपनी का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। उनका पक्ष मिलने के बाद उसे भी खबर में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।
एक मजदूर दिल्ली गया था परिवार का भविष्य संवारने के लिए लेकिन सरिया का एक भारी बंडल उसके सपनों और जिंदगी दोनों पर भारी पड़ गया। पीछे रह गए दो छोटे बच्चे, एक पत्नी और एक ऐसा परिवार, जो अब इंसाफ और सहारे की उम्मीद लगाए बैठा है।