भिखारी को चाहिए बिरयानी नहीं तो...! पाकिस्तान की अक्ल आयी ठिकाने, फिर भी अकड़ बा...

भिखारी को चाहिए बिरयानी नहीं तो...! पाकिस्तान की अक्ल आयी ठिकाने, फिर भी अकड़ बाकी, भारत से मैच खेलने के लिए रखी शर्तें

आईसीसी ने राजस्व रोकने की धमकी तो पाकिस्तान की अक्ल आई ठिकाने!

भिखारी को चाहिए बिरयानी नहीं तो पाकिस्तान की अक्ल आयी ठिकाने फिर भी अकड़ बाकी भारत से मैच खेलने के लिए रखी शर्तें

प्रमोद कुमार

रांची/डेस्क:  आपने कभी गूगल पर 'भिखारी' शब्द सर्च किया होगा तो अक्सर उसमें पूर्व पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का कटोरा लिए तस्वीर अक्सर दिखी होगी. पाकिस्तान की हालत को एक शब्द में बयां करें तो 'भिखारी' शब्द सबसे माफिक है. मगर पाकिस्तान अकल है कि आती नहीं, अकड़ है कि जाती नही. इसका ताजा उदाहरण विश्व कप T-20 में भारत के खिलाफ मैच के बहिष्कार से समझा जाता है. अपनी अकड़ में बांग्लादेश को बिना मतलब का समर्थन देने के नाम पर उसने भारत से मैच खेलने से इनकार कर दिया, लेकिन उसे जैसे ही इस बात का अहसास हुआ कि यह तो उसके लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है. घाटा भी ऐसा कि पाकिस्तान अपना सिर भी पटक ले तो उसकी भरपाई नहीं कर सकता. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने जैसे ही उसको मिलने वाली सैकड़ों करोड़ के राजस्व की हानि का भय दिखाया तो उसकी अक्ल ठिकाने आ गये. अक्ल तो आयी, फिर भी उसे अकड़ तो दिखानी है, इसलिए उसने कहते हुए कि अगर आईसीसी उसकी तीन शर्तें मान ले तो वह भारत के साथ मैच खेलने पर विचार कर सकता है. मानों वह आईसीसी, बीसीसीआई और क्रिकेट पर कोई एहसान कर रहा हो.

गतिरोध खत्म करने की छटपटाहट!

अब जबकि टी-20 विश्व कप शुरू हो चुका है. भारत के साथ पाकिस्तान के मैच का दिन नजदीक आ रहा है तो पाकिस्तान के क्रिकेट फैन्स ही नहीं, पाकिस्तानी क्रिकेटरों और पीसीबी की छटपटाहट बढ़ती जा रही है. क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता है कि अगर उसने भारत के साथ मैच का बहिष्कार कर दिया तो सिर्फ वर्तमान में ही नहीं, भविष्य में भी बड़ी चपत लगने वाली है. यह चपत सिर्फ राजस्व ही नहीं, बल्कि दूसरे देशों से क्रिकेट सम्बंधों और क्रिकेट आयोजनों के रूप में भी हो सकता है.  इसीलिए आनन-फानन में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड, आईसीसी और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड रविवार को लाहौर में मिल बैठे. इस बैठक में पीसीबी ने भारत के साथ मैच खेलने के लिए तीन शर्तें रख दी. पीसीबी के अनुसार अगर आईसीसी उसकी यह शर्त मान लेता है तो पाकिस्तान भारत के साथ मैच खेलने के लिए राजी हो सकता है. यानी मैच न खेलने के अपने फैसले को पलटने की सम्भावना तलाश कर सकता है.

पाकिस्तान ने आईसीसी के सामने रखीं तीन शर्तें

अब जरा देख लें कि पीसीबी ने भारत के साथ मैच खेलने के लिए राजी होने के लिए कौन-कौन-सी शर्तें रखी हैं-

  1. भारत-पाकिस्तान द्विपक्षीय संबंधों को बहाल किया जाए.
  2. आसीसी से पाकिस्तान को राजस्व मिलता है, उसमें वृद्धि की जाए.
  3. भारत ने पाकिस्तान और बांग्लादेश के लिए जो नो-हैंडशेक एक्ट तय कर रखा है, उसे खत्म किया जाए. ऐसी घटना दोबारा कभी न हो.

अभी तक घटनाक्रम के अनुसार, अगर आईसीसी पीसीबी की शर्तें नहीं मानता है तो वह टी20 विश्व कप में भारत के खिलाफ नहीं खेलेगा. यहां एक बात याद दिला दें कि पाकिस्तान पिछले कुछ टूर्नामेंट में भारत के साथ मैच खेल चुका है. भले ही ये मैच तटस्थ देश में खेले गये. लेकिन इस बार का कारण राजनीतिक है. पाकिस्तान ने बांग्लादेश को नैतिक (अनैतिक) समर्थन  देते हुए अपने कट्टर प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ बहिष्कार का ऐलान कर दिया है. पाकिस्तान का यह फैसला पूरी तरह से शहबाज शरीफ सरकार का फैसला है, भले ही उसमें पीसीबी की इच्छा शामिल है, लेकिन पाकिस्तान सरकार ने बहिष्कार के पीछे के कारणों को स्पष्ट नहीं किया.

जो भी हो, पाकिस्तान भारत के साथ मैच खेलता है या नहीं, आईसीसी पाकिस्तान की शर्तें मानता है या नहीं, यह तो कुछ समय के बाद स्पष्ट हो जायेगा, लेकिन भारत ही नहीं, पाकिस्तान भी अच्छी तरह से जानता है कि आईसीसी की चीफ की कुर्सी पर बैठा कौन है. फिर भी हम भारतीयों की यह बड़ी तमन्ना है कि पाकिस्तान भारत के साथ मैच नहीं खेलने की 'गलती' कर ही डाले.

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