न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क / Bengalelections
सावन कुमार / राजनीति तर्क : पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आगामी चुनावों को लेकर अपने स्टार प्रचारकों की सूची जारी कर दी है, लेकिन इस लिस्ट में भोजपुरी सिनेमा के चर्चित चेहरा और ‘पॉवर स्टार’ पवन सिंह का नाम नदारद है। गौरतलब है कि 2024 लोकसभा चुनाव में पवन सिंह ने आसनसोल से भाजपा के ऑफर ठुकरा दिया था और काराकाट से निर्दिलिय चुनाव लड़ने का फैसला लिया था। जिसके बाद भाजपा और पवन सिंह के बीच काफी दूरी बढ़ गई थी ।
आसनसोल प्रकरण: जहां से शुरू हुआ सियासी असहजता का दौर
दरअसल, भाजपा ने लोकसभा चुनाव के दौरान पवन सिंह को आसनसोल सीट से उम्मीदवार घोषित किया था। लेकिन उम्मीदवार बनाए जाने के तुरंत बाद पवन सिंह ने सोशल मीडिया के जरिए चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया। इस फैसले ने न सिर्फ पार्टी को असहज स्थिति में डाल दिया, बल्कि राजनीतिक तौर पर कई सवाल भी खड़े कर दिए। पार्टी की ओर से उम्मीदवार घोषित होने के बाद इस तरह पीछे हटना, भाजपा के लिए एक बड़ा झटका माना गया था।
बंगाल चुनाव प्रचारक की लिस्ट से पवन सिंह का नाम गायब; संयोग या रणनीति?
अब जब भाजपा ने बंगाल चुनाव के लिए अपने स्टार प्रचारकों की सूची जारी की है, तो पवन सिंह का नाम उसमें नहीं होना कई संकेत देता है।
- क्या भाजपा ने आसनसोल प्रकरण के बाद उनसे दूरी बना ली है?
- या फिर पार्टी को लगता है कि बंगाल में उनका प्रभाव सीमित है?
- क्या खुद पवन सिंह ने प्रचार से दूरी बनाने का फैसला किया है?
इन सवालों के जवाब फिलहाल साफ नहीं हैं, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इन पर चर्चा तेज है।
बंगाल में ‘लोकल बनाम बाहरी’ फैक्टर
पश्चिम बंगाल की राजनीति में “स्थानीय बनाम बाहरी” का मुद्दा हमेशा अहम रहा है। ऐसे में भाजपा इस बार ज्यादा स्थानीय चेहरों पर दांव खेलती दिख रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि पार्टी अपनी रणनीति को पूरी तरह बंगाल के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों के अनुसार ढाल रही है, जहां बाहरी चेहरों की स्वीकार्यता सीमित हो सकती है।
पवन सिंह की लोकप्रियता बनाम राजनीतिक उपयोगिता
इसमें कोई दो राय नहीं कि पवन सिंह की लोकप्रियता बिहार, यूपी और प्रवासी समुदायों में जबरदस्त है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह लोकप्रियता बंगाल के वोट में तब्दील हो सकती है? आसनसोल विवाद के बाद भाजपा और पवन सिंह के बीच काफी दूरी बन गई थी लेकिन बिहार विधानसभा चुनाव 2026 में पवन सिंह भाजपा के प्रचारक लिस्ट में शामिल थे, लेकिन सवाल फिर वही है कि मजह चार महीने के अंदर ही भाजपा बंगाल चुनाव के वक्त पवन सिंह को भूल गई या फिर पॉवर स्टार ने खुद दूरी बना ली है ? या फिर आसनसोल घटना के बाद भाजपा शायद इस जोखिम को लेने से बचना चाहती है।
पार्टी और स्टार के बीच खामोशी
दिलचस्प बात यह है कि इस पूरे मामले पर न तो भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आई है और न ही पवन सिंह ने कुछ कहा है। यह खामोशी भी अपने आप में कई राजनीतिक संकेत दे रही है। आसनसोल से शुरू हुआ विवाद अब स्टार प्रचारक सूची तक पहुंच गया है। पवन सिंह की गैरमौजूदगी सिर्फ एक नाम का छूटना नहीं, बल्कि यह भाजपा की बदलती रणनीति और अंदरूनी समीकरणों की ओर इशारा करता है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में यह दूरी और बढ़ती है या फिर सियासत में ‘पॉवर स्टार’ की वापसी किसी नए मोड़ के साथ होती है।
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