फलक शमीम/न्यूज 11 भारत
हजारीबाग/डेस्क: जैन धर्म के 10 लक्षण पर्व का तीसरा दिन "उत्तम आर्जव धर्म" बहुत ही धूमधाम के साथ दोनों जैन मंदिर में मनाया गया. पर्व की शुरुआत अभिषेक शांति धारा और पूजन विधान हरसो उल्लास के साथ की गई, * इस धर्म की विशेषता सरलता मायाचार का त्याग और सच्ची ईमानदारी है इस धर्म के अनुसार मन में जो है वही बोलना चाहिए जो वचन दिए हैं उन्हें पूरा करना चाहिए कपट या छल का धर्म में कोई स्थान नहीं है, और यह सरल व सहज व्यक्तित्व ही सच्चा धर्म है जो व्यक्ति सहज और सरल होता है वह जीवन में अधिक संपत्ति प्राप्त करता है, धर्म में किसी भी प्रकार के कपट या छल का कोई स्थान नहीं है,
मन में जो विचार हो वही बोलना चाहिए और बोले हुए वचन के अनुसार ही कार्य करना चाहिए, एक सरल और सच्चा व्यक्तित्व ही शाश्वत धर्म की पहचान है, यह धर्म पर्यूषण पर्व का हिस्सा है, और जैन धर्म में पर्युषण पर्व के तीसरे धर्म अंग के रूप में मनाया जाता है, जो दस लक्षण पर्व का हिस्सा है, संक्षेप में उत्तम और जो धर्म हमें मायाचार से दूर रहकर सरल ईमानदार और सत्य सरल जीवन जीने की शिक्षा देता है, छल कपट से भरा जीवन जीवन को दुख और संसार के चक्कर में डालता है जबकि सरल जीवन मोक्ष के मार्ग पर ले जाता है, उत्तम आर्जाव धर्म व्यक्ति को बाहरी दिखावे से हटकर अपने मन को सच्चा सरल और शुद्ध बनाने की प्रेरणा देता है, संध्या में दोनों मंदिर की में महा आरती वह ब्रह्मचारिणी बहनों द्वारा शास्त्र प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ पर्व का समापन किया गया, यह जानकारी दिगंबर जैन पंचायत के मीडिया प्रभारी अमित जैन विनायक द्वारा दी गई.