संतोष कुमार/न्यूज़11भारत
चांडिल/डेस्क;- झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान ईचागढ़ विधानसभा में बढ़ते जंगली हांथी के मामले को लेकर सोमवार को विधायक सविता महतो ने तारांकित प्रश्न में जंगली हाथियों के मामले को पुरजोर तरीका से सदन में उठाया. इस दौरान विधायक ने सदन में प्रश्न कियाकि क्या यह बात सही है कि ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र के सभी प्रखंड जंगली हाथियों के आतंक से पीड़ित है तथा आए दिन जंगली हाथी द्वारा घर, मकान खेती एवं फसलों के साथ-साथ जान माल की भी क्षति हो रही है उत्तर स्वीकारात्मक , क्या यह बात सही है कि चांडिल डैम निर्माण से विस्थापित हुए डूब क्षेत्र में जंगली हाथियों द्वारा नुकसान की घटनाओं में अत्यधिक वृद्धि हुई है उत्तर स्वीकारात्मक, क्या यह बात सही है कि वर्णित सभी डूब क्षेत्र में हाथियों से हुई फसल नुकसान एवं मकान क्षति पर किसी भी प्रकार का मुआवजा का भुगतान विभाग द्वारा नहीं किया जा रहा है उत्तर झारखंड सरकार वन एवं पर्यावरण विभाग की अधिसूचना संख्या 03/ वन भूमि /47/2009-3483 व.प. रांची दिनांक 17.09.2010के द्वारा सरायकेला खरसावां एवं पश्चिम सिंहभूम जिले में स्थित भूमि जो चांडिल डैम एवं ईचा डैम के निर्माण के कारण डूबी गई तथा उपाबद्ध अनुसूची में विनिदृष्ट है एवं जिसका क्षेत्रफल क्रमश: 4647743 एकड़ एवं 25212090 एकड़ को आरक्षित वन अधिसूचित किया गया है. आदि उपयुक्त खण्डो के उत्तर स्वीकारात्मक है तो क्या सरकार ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र में जंगली हाथियों के आतंक से निजात दिलाने के साथ-साथ पूर्व में हुए नुकसान के मुआवजा में वृद्धि करते हुए पीड़ितो को भुगतान कराने की विचार रखती है यदि हाँ तो कब तक नहीं तो क्यों? उत्तर वर्तमान में मुआवजा बढ़ाने हेतु कोई भी प्रस्ताव सरकार के स्तर पर विचाराधीन नहीं है. वर्तमान में वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग झारखंड रांची के संकल्प ज्ञापांक वन्यप्राणी 08/2000 खण्ड 2265/व.प. रांची दिनांक 25.06.2023 में वृद्धि हुई थी जिसके आलोक में मुआवजा का भुगतान किया जाता है. इसके अतिरिक्त जंगली हाथियों के आतंक से निजात दिलाने हेतु सरायकेला वनप्रमंडल द्वारा कोई उपाय किए जा रहे हैं जो निम्नवत है 1. सरायकेला वन प्रमंडल अंतर्गत एक त्वरित कार्य दल (क्यूआरटी )टीम कार्यरत है. त्वरित कार्यदल द्वारा जंगली हाथियों को हाथी प्रवास स्थल की ओर भेजने की कार्रवाई की जाती है. साथी स्थानीय ग्रामीण को जंगली हाथियों से सुरक्षा हेतु समय-समय पर जागरूक भी किया जाता है. 2. सरायकेला वन प्रमंडल अंतर्गत हाथियों की निगरानी हेतु 4 वाच टावर का निर्माण कराया गया है जो चांडिल के रामगढ़, कुरली, पालना व ईचागढ़ के पीलीद में है. 3. सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में एफएम रेडियो के माध्यम से जंगली हाथियों से बचाव एवं सावधान रहने की सूचना दी जाती है.