पंकज कुमार/न्यूज़11 भारत
गुमला/डेस्क: घाघरा प्रखंड के गुनिया गांव में पेयजल संकट इस कदर गहरा गया है कि ग्रामीणों को अपनी प्यास बुझाने के लिए खुद ही मोर्चा संभालना पड़ा. शनिवार को दिन के 12 बजे गांव के दो दर्जन से अधिक महिला-पुरुषों ने श्रमदान कर वर्षों पुराने कुएं की साफ-सफाई की, ताकि पीने योग्य पानी की व्यवस्था हो सके. ग्रामीणों ने भीलियस मशीन और बाल्टियों की मदद से कुएं से गंदगी निकालकर उसे उपयोग लायक बनाया. ग्रामीणों ने बताया कि गांव में पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण लोगों को करीब एक किलोमीटर दूर स्थित कुएं से पानी लाना पड़ रहा है. इसका सबसे अधिक असर महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों पर पड़ रहा है. बच्चों को पानी लाने भेजने में भी परिजनों को हर समय किसी अनहोनी की चिंता सताती रहती है.
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में लगे सभी सोलर जलमीनार लंबे समय से खराब पड़े हैं, लेकिन उनकी मरम्मत की दिशा में कोई पहल नहीं की जा रही है. इससे पूरे गांव में पेयजल संकट लगातार गहराता जा रहा है.समाजसेवी करीमन उरांव ने बताया कि जल्द ही ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल गुमला उपायुक्त से मिलकर ज्ञापन सौंपेगा. ज्ञापन में गांव में एक बड़े जलमीनार की स्थापना और खराब पड़े सोलर जलमीनारों की शीघ्र मरम्मत कराने की मांग की जाएगी. ग्रामीणों ने कहा कि स्वच्छ पेयजल उनकी मूलभूत आवश्यकता है और प्रशासन को इस दिशा में तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए. ग्रामीणों का कहना है कि 15वें वित्त आयोग की राशि से कई स्थानों पर नए सोलर जलमीनार लगाए जा रहे हैं, लेकिन पहले से खराब पड़े जलमीनारों की मरम्मत नहीं हो रही है. उन्होंने मांग की कि नई योजनाओं के साथ-साथ बंद पड़ी पेयजल योजनाओं को भी प्राथमिकता के आधार पर चालू कराया जाए, ताकि लोगों को तत्काल राहत मिल सके.