संदीप बरनवाल/न्यूज़11भारत
गावां/डेस्क: गावां थाना क्षेत्र के तारापुर स्थित बंद पड़े पत्थर खदान में डूबी लोरिया निवासी सावनी मंझियांन का शव पांचवें दिन भी बरामद नहीं हो सका. शव की तलाश में रांची से पहुंची एनडीआरएफ़ की 30 सदस्यीय टीम ने गुरुवार और शुक्रवार को लगातार दो दिनों तक खदान में सघन तलाशी अभियान चलाया. टीम के जवानों ने खदान के गहरे पानी में उतरकर विभिन्न स्थानों पर काफी मशक्कत की, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद शव का कोई सुराग नहीं मिल सका.
लगातार दो दिनों तक अभियान चलाने के बाद भी सफलता नहीं मिलने से एनडीआरएफ की टीम को आखिरकार खाली हाथ लौटना पड़ा. बताया जा रहा है कि खदान काफी गहरी होने के साथ-साथ पानी भी अत्यधिक गहरा है, जिसके कारण तलाशी अभियान में टीम को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. कई स्तरों पर पानी के भीतर तलाश की गई, लेकिन शव बरामद नहीं हो पाया.
पांच दिनों से परिजन कर रहे शव का इंतजार
सावनी मंझियांन के खदान में डूबने के बाद से ही उनके परिजन बेसब्री से शव मिलने का इंतजार कर रहे हैं. पांच दिन बीत जाने के बाद भी शव बरामद नहीं होने से परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है. वहीं, स्थानीय ग्रामीण भी इस घटना को लेकर काफी मायूस और आक्रोशित हैं.
ग्रामीणों को उम्मीद थी कि एनडीआरएफ की टीम के पहुंचने के बाद शव को जल्द ही खदान से बाहर निकाल लिया जाएगा. गुरुवार और शुक्रवार को लगातार अभियान चलने के बावजूद शव नहीं मिलने से ग्रामीणों की उम्मीदों को भी झटका लगा है.
टीम के लौटने के दौरान ग्रामीणों में दिखा आक्रोश
शव बरामद किए बिना एनडीआरएफ की टीम के वापस लौटने के दौरान ग्रामीणों के विरोध का भी सामना करना पड़ा. ग्रामीणों में इस बात को लेकर नाराजगी देखी गई कि पांच दिन बीत जाने के बावजूद शव नहीं निकाला जा सका. ग्रामीणों का कहना था कि परिजन पिछले कई दिनों से शव मिलने की आस लगाए बैठे हैं और जल्द से जल्द शव की तलाश पूरी की जानी चाहिए.
हालांकि, खदान की गहराई और पानी के अंदर मौजूद कठिन परिस्थितियों के कारण तलाशी अभियान में कई तरह की चुनौतियां सामने आने की बात बताई जा रही है. एनडीआरएफ टीम के लगातार प्रयास के बावजूद शव नहीं मिलने से पूरे क्षेत्र में घटना को लेकर चिंता और मायूसी का माहौल बना हुआ है.
प्रशासन की कार्रवाई पर भी नजर
घटना के पांच दिन बाद भी शव बरामद नहीं होने के कारण अब ग्रामीणों और परिजनों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है. परिजनों की मांग है कि हर संभव संसाधन का इस्तेमाल कर सावनी मंझियांन के शव को खदान से बाहर निकाला जाए, ताकि परिवार को अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करने का अवसर मिल सके.
इधर, बंद पड़े पत्थर खदान में महिला के डूबने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. ग्रामीणों का कहना है कि बंद पड़ी खदानों में पानी भर जाने के कारण अक्सर हादसे का खतरा बना रहता है. ऐसे स्थानों की सुरक्षा और घेराबंदी को लेकर भी प्रशासन को गंभीर कदम उठाने की जरूरत है.
फिलहाल पांच दिन बीत जाने के बाद भी सावनी मंझियांन का शव खदान में ही है. शव की बरामदगी नहीं होने से जहां परिजन सदमे में हैं, वहीं पूरे क्षेत्र के लोगों में भी मायूसी और आक्रोश का माहौल बना हुआ है.
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