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रांची/डेस्क: आज से राज्य के 14 जिलों में शुरू होने वाले मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) कार्यक्रम का शुभारम्भ स्वास्थ्य मंत्री, इरफ़ान अंसारी एवं केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने वर्चुअल माध्यम से किया.
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि फाइलेरिया एक गंभीर रोग है और राज्य से इसके उन्मूलन के लिए आज से फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत 10 फरवरी से राज्य के फाइलेरिया से प्रभावित 14 जिलों के 91 प्रखंडों में मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन कार्यक्रम की शुरुआत की जायेगी. इसमें 11 जिलों (पूर्वी सिंहभूम, बोकारो, देवघर, धनबाद, रांची, गढ़वा, गिरिडीह, गुमला, लोहरदगा, रामगढ, साहिबगंज) में दो दवाएं डीईसी और अल्बेंडाजोल और 3 जिलों (कोडरमा, पाकुड़, सिमडेगा) में तीन दवाएं यानी डीईसी, अल्बेंडाजोल और आइवरमेक्टिन के साथ मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन अभियान चलाया जा रहा है. इस दौरान प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा जनसमुदाय को बूथ एवं घर घर जा कर निःशुल्क फाइलेरिया रोधी दवाइयाँ खिलाई जायेगी. ये दवायें पूरी तरह से सुरक्षित हैं. हमें इस बात का विशेष ध्यान रखना है कि 2 साल से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार लोगों को छोड़कर, सभी को फाइलेरिया रोधी दवाओं का सेवन स्वास्थ्य कर्मियों के सामने करना है. यह दवायें खाली पेट नहीं खानी हैं.
उन्होंने निर्देश दिए कि राज्य में फाइलेरिया के संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए समुदाय के सभी लोगों को अपने सामने दवाये खिलाना सुनिश्चित करें और इसके लिए सभी विभागों की मदद भी ली जाए. स्वास्थ्य मंत्री ने इस कार्यक्रम के प्रचार प्रसार के लिए सभी माध्यमों के उपयोग करने पर जोर देते हुए कहा कि हमे अधिक से अधिक डिजिटल प्रचार के माध्यमों का उपयोग कर जनसमुदाय को जागरूक करना चाहिए.
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि फाइलेरिया से सुरक्षित रखने वाली दवाएं स्वयं भी खाए, अपने परिजनों को खिलाये और जनसमुदाय को भी दवाएं खाने के लिए प्रेरित करें. उन्होंने कहा कि मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन कार्यक्रम कार्यक्रम की सफलता तभी संभव है जब इसमें जन सहभागिता हो. कार्यक्रम को सफल बनाये ताकि झारखण्ड शीघ्र फाइलेरिया मुक्त हो सके.
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