सड़क सुरक्षा

चंदवा में 26 दिन में 11 मौत के बाद कॉरपोरेट कंपनियों की भूमिका पर सवाल, CSR के तहत सड़क सुरक्षा पर काम करने की मांग

चंदवा और आसपास के इलाकों में लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं और 26 दिनों में 11 लोगों की मौत के बाद अब कॉरपोरेट कंपनियों की सामाजिक जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठने लगे हैं.

By : Ark Sahuliyar
चंदवा में 26 दिन में 11 मौत के बाद कॉरपोरेट कंपनियों की भूमिका पर सवाल, CSR के तहत सड़क सुरक्षा पर काम करने की मांग

राहुल कुमार/न्यूज11 भारत 
चंदवा/डेस्क:
चंदवा और आसपास के इलाकों में लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं और 26 दिनों में 11 लोगों की मौत के बाद अब कॉरपोरेट कंपनियों की सामाजिक जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठने लगे हैं. माकपा के वरिष्ठ नेता सह कामता पंचायत समिति सदस्य अयुब खान ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जिले में संचालित कोयला और बॉक्साइट कंपनियों से सड़क सुरक्षा एवं जनहित के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने की मांग की है.

अयुब खान ने कहा कि एक ओर लातेहार जिला प्रशासन सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए गंभीर प्रयास कर रहा है, वहीं दूसरी ओर जिले में खनन एवं औद्योगिक गतिविधियां संचालित करने वाली कॉरपोरेट कंपनियां सड़क सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी के मामले में अपेक्षित भूमिका निभाती नजर नहीं आ रही हैं.

उन्होंने कहा कि 22 जुलाई को चंदवा नगर के बीच एनएच पर दामोदर के समीप स्कॉर्पियो दुर्घटना में चार लोगों की मौत हुई थी. यह घटना चकला रेश्मी पावर प्लांट के नजदीक हुई, लेकिन कंपनी की ओर से दुर्घटना की रोकथाम अथवा राहत के लिए कोई ठोस पहल दिखाई नहीं दी.

इसके बाद 15 अगस्त को चंदवा-चांपी मार्ग के डेढ़टंगवा घाटी में कंटेनर की चपेट में आने से छह लोगों की मौत हो गई. वहीं 17 अगस्त को चंदवा-लातेहार मार्ग पर शिवा टोली के समीप सड़क पर बने ठोकर से टेंपो दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद चालक की मौत हो गई. अयुब खान ने कहा कि लगातार हो रही इन घटनाओं के बावजूद कॉरपोरेट कंपनियों की ओर से सड़क सुरक्षा को लेकर ठोस पहल नहीं दिखना चिंता का विषय है.

प्रशासन गंभीर, कंपनियों की भूमिका पर उठे सवाल
अयुब खान ने कहा कि लातेहार उपायुक्त संदीप कुमार, भा.प्र.से. सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए गंभीरता से पहल कर रहे हैं. इसी क्रम में चंदवा-चांपी-लोहरदगा मार्ग पर भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाने की पहल की गई है.

उन्होंने कहा कि जिले में बालूमाथ में सीसीएल और मगध परियोजना, चंदवा में बनहरदी कोल ब्लॉक-एनटीपीसी, चकला में रेश्मी पावर प्लांट, टीवीएनएल का रजवार कोल ब्लॉक तथा डीवीसी की तुबेद कोल माइंस जैसी बड़ी परियोजनाएं संचालित हैं. इन कंपनियों से भी सड़क सुरक्षा और स्थानीय जनहित में सक्रिय भूमिका निभाने की अपेक्षा है.

CSR फंड से सड़क सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग
माकपा नेता ने मांग की कि कोयला और बॉक्साइट कंपनियां अपने CSR (कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) फंड का उपयोग सड़क सुरक्षा के लिए करें. उन्होंने खतरनाक स्थानों पर साइन बोर्ड, चेतावनी बोर्ड, पर्याप्त लाइटिंग और सोलर स्ट्रीट लाइट लगाने की मांग की.

इसके अलावा दुर्घटना की स्थिति में तत्काल सहायता के लिए प्रमुख मार्गों पर एम्बुलेंस की व्यवस्था, स्थानीय अस्पतालों और ट्रॉमा सेंटरों में आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं को बेहतर करने तथा आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की गई है.

अयुब खान ने खनन प्रभावित क्षेत्रों में प्रदूषण से होने वाली बीमारियों से बचाव एवं इलाज के लिए कंपनियों द्वारा अस्पताल स्थापित कर संचालित करने तथा स्थानीय बच्चों की शिक्षा के लिए स्कूल खोलने की भी मांग की.

उन्होंने कहा कि कंपनियों को अपने व्यावसायिक हितों के साथ-साथ स्थानीय समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए. सड़क दुर्घटनाओं में लगातार हो रही मौतों के बीच कंपनियों की निष्क्रियता दुर्भाग्यपूर्ण है और अब CSR के तहत ठोस जनहितकारी कदम उठाने की जरूरत है.