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देवघर/डेस्क: ऋषि ब्रह्मर्षि सांस्कृतिक मंच के महासचिव मणिशंकर ने यह मांग किया हैं कि अयोध्या जाकर प्रधानमंत्री प्रभु श्रीराम के समक्ष क्षमा याचना करें. प्रधानमंत्री ने प्रभु श्रीराम की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 क़ो क़ी. लेकिन करोड़ों की चंदा चोरी से देश के करोड़ो हिंदू को गहरा आघात पहुंचा है. देश विदेश से जिन सनातनियों ने पुरुषोत्तम श्री राम मंदिर निर्माण में चंदा दिया करोड़ों की लूट से आज ठगे महसूस कर रहे हैं बल्कि अयोध्या राम मंदिर के प्रति उनके आस्था को भी ठेस पहुंचा है. इसलिए प्रधानमंत्री मंदिर व्यवस्था की कमियों को स्वीकार करते हुए स्वयंसेवक शीर्ष नेतृत्व के साथ क्षमा याचना अयोध्या में करें साथ ही देश को यह विश्वास दिलाएं की ऐसी गलती दोहराई नहीं जाएगी.
विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ मंदिर के प्रांगण में स्थित श्री राम मंदिर में आज भव्य क्षमा याचना हवन का आयोजन किया गया. मणिशंकर ने बताया कि सनातन धर्म के मान्यताओं के अनुसार अगर किसी धार्मिक कार्य में त्रुटि, बाधा या कमीयां हो जाती है तो क्षमा याचना किया जाता है. इसलिए हर एक हिंदू धार्मिक अनुष्ठान के अंत में क्षमा याचना करना अनिवार्य होता है. मणिशंकर ने कहा की मर्यादा पुरुषोत्तम राम के कोष से करोड़ों की लूट से आज हम सब शर्मिंदा है. इस कुकृत्य के लिए जो भी जिम्मेदार है, हम सब सनातनी होने के नाते श्री राम के समक्ष क्षमा याचना हवन कर माफी मांग रहें है. इस क्षमा याचना में सनातन धर्म के सभी वर्गों ने हिस्सा लिया - दलित, पिछड़ा वर्ग, आदिवासी, सामान्य वर्ग आदि.
मणिशंकर ने बताया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र में ट्रस्ट का गठन प्रधानमंत्री द्वारा 5 फरवरी 2020 में किया गया जिसमें 15 सदस्यों की नियुक्ति प्रधानमंत्री कार्यालय से हुआ. आश्चर्य की बात यह है कि हर कदम पर CCTV होने के बावजूद चढ़ावा चोरी प्रकरण उजागर होने में वर्षों क्यों लगा. मोदी जी एवं योगी जी को पारदर्शिता दिखाते हुए निष्पक्ष जांच उच्चतम न्यायालय से कराना चाहिए. इस हवन कार्यक्रम को आचार्य लंबोदर परिहस्त एवं देवनारायण फलाहारी ने मंत्रो उच्चारण के साथ संपन्न कराया . पंडा धर्मरक्षणी ने भी सहयोग प्रदान किया.
आज के इस क्षमा याचना हवन में प्रमुख रूप से मणिशंकर के अलावा राजेंद्र दास, प्रोफेसर उदय प्रकाश, बृजभूषण राम, अनुराग आनंद, कुमार बाबा, पंकज भारती, अनिल चंद्रवंशी, सुबोध दास, अमरिंदर भोपाल, निर्णय कुमार, मणिकांत कुमार, चंद्र देवदास, किशोर रवानी आदि.