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जामताड़ा/डेस्क : झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा की रविवार देर रात जामताड़ा जिले में पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई. उसे साहिबगंज मंडल कारा से धनबाद मंडल कारा ट्रांसफर किया जा रहा था. इसी दौरान उसने भागने का प्रयास किया, जिसके बाद हुई पुलिस की जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया.
जानकारी के अनुसार, सुजीत को लेकर जा रही कैदी वाहन जामताड़ा के टाउन थाना क्षेत्र स्थित कुसाईडीह मोड़ के पास पहुंची थी, तभी गाड़ी का टायर पंचर हो गया. इसी बीच सुजीत सिन्हा ने टॉयलेट जाने की अनुमति मांगी. वाहन रुकते ही उसने मौके का फायदा उठाया और एक सुरक्षाकर्मी से उसका हथियार छीन लिया और भागते हुए पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी.पुलिस ने पहले उसे रुकने की चेतावनी दी, लेकिन जब उसने गोलीबारी जारी रखी तो एस्कॉर्ट टीम ने आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की. इस दौरान सुजीत सिन्हा गंभीर रूप से घायल हो गया और घटनास्थल पर ही उसकी मौत हो गई.
घटना के बाद इलाके की घेराबंदी
मुठभेड़ के बाद पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया. जामताड़ा के पुलिस अधीक्षक शंभू कुमार सिंह और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे. पुलिस ने फॉरेंसिक जांच के लिए FSL टीम को बुलाया. जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएंगी.
सुरक्षा कारणों से कई बार बदली गई थी जेल
आतंक का पर्याय रहा गैंगस्टर सुजीत सिन्हा को पहले मेदिनीनगर केंद्रीय कारा में रखा गया था. हालांकि, अक्टूबर 2025 में जेल प्रशासन ने सुरक्षा और प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए उसे साहिबगंज मंडल कारा भेज दिया था. पुलिस और जेल प्रशासन की रिपोर्ट में आशंका जताई गई थी कि वह पलामू में रहते हुए जेल के भीतर से ही अपने गिरोह का संचालन कर रहा है. इसी वजह से उसे अलग जेल में ट्रांसफर किया गया था.
60 से अधिक मामलों का आरोपी था सुजीत सिन्हा
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, सुजीत सिन्हा पर हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी, लेवी वसूली, आगजनी, आर्म्स एक्ट और संगठित अपराध से जुड़े 60 से अधिक मामले दर्ज थे. उसके खिलाफ रांची, पलामू, रामगढ़, लातेहार, चतरा, हजारीबाग, धनबाद और अन्य जिलों में कई आपराधिक केस दर्ज थे. केवल पलामू जिले में ही उसके खिलाफ 20 से अधिक मामले लंबित बताए जाते हैं. उसका नेटवर्क कोयलांचल क्षेत्र तक फैला हुआ था और वह कारोबारियों, ठेकेदारों तथा अन्य लोगों से रंगदारी वसूलने के लिए अपने गिरोह का इस्तेमाल करता था.
जेल में रहते हुए भी गिरोह सक्रिय रहने का आरोप
जेल में बंद रहने के बावजूद सुजीत सिन्हा अपने गिरोह के संपर्क में बना रहता था. इसी वजह से उसे समय-समय पर अलग-अलग जेलों में रखा गया. पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि जेल के भीतर निगरानी बढ़ने के बाद गिरोह के संचालन में महिलाओं की भूमिका बढ़ गई थी. पुलिस के अनुसार, उसकी पत्नी रिया सिन्हा गिरोह के आर्थिक लेन-देन और नेटवर्क को सक्रिय रखने में अहम भूमिका निभाती थी.
अमन साहू के बाद सुजीत सिन्हा का भी एनकाउंटर
झारखंड के अपराध जगत में सुजीत सिन्हा और अमन साहू का नाम लंबे समय तक चर्चा में रहा. दोनों कभी एक ही आपराधिक नेटवर्क का हिस्सा बताए जाते थे, लेकिन बाद में उनके बीच प्रतिद्वंद्विता हो गई. बता दें कि इससे पहले गैंगस्टर अमन साहू भी पुलिस एनकाउंट में मारा गया था. अब सुजीत सिन्हा की मौत के साथ झारखंड के संगठित अपराध से जुड़े एक और चर्चित नाम का अंत हो गया.