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रांची/डेस्क: राज्य में जल संकट, योजनाओं की सुस्ती और खराब पड़े चापानलों को लेकर सरकार अब सख्त नजर आ रही है. जल जीवन मिशन की समीक्षा कर विभागीय मंत्री योगेंद्र प्रसाद महतो ने अधिकारियों की जवाबदेही तय की. बैठक में जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत ग्रामीण और हर घर जल योजना की प्रगति पर चर्चा हुई. इस दौरान कई अधिकारियों की कार्यशैली पर मंत्री ने नाराजगी जताई और जमकर क्लास भी लगाया.
राजधानी रांची के विश्वा सभागार में आयोजित इस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में जल जीवन मिशन 2.0 के लक्ष्यों, राज्यभर में खराब पड़े चापाकलों की मरम्मत, एसवीएस क्लस्टर योजनाओं, एसवीएस योजनाओं की प्रगति और उनकी कार्यशीलता पर विस्तार से समीक्षा की गई.
बैठक में हर घर जल प्रमाणित गांवों की स्थिति भी सामने रखी गई, जहां कई जिलों में लक्ष्य के मुकाबले प्रगति धीमी पाई गई. समीक्षा के दौरान मंत्री योगेंद्र प्रसाद महतो ने साफ कहा कि योजनाओं में लापरवाही किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी. जिन अधिकारियों के क्षेत्रों में काम धीमा है, उन्हें जल्द सुधार का निर्देश दिया गया.
मंत्री ने कहा कि जनता तक पानी पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है और इसमें किसी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं होगी. आम जनता की सुविधा के लिए टोल फ्री नंबर भी जारी किया गया है. बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि राज्य में खराब पड़े चापाकलों की संख्या अब मुश्किल से एक हजार के आसपास रह गई है, जिन्हें जल्द दुरुस्त करने का काम जारी है. सरकार का दावा है कि ग्रामीण इलाकों में पेयजल संकट दूर करने के लिए तेजी से काम किया जा रहा है.
जल जीवन मिशन को लेकर हुई इस समीक्षा बैठक के बाद साफ है कि सरकार अब जमीनी स्तर पर परिणाम चाहती है. आने वाले दिनों में अधिकारियों की जवाबदेही और योजनाओं की रफ्तार दोनों पर नजर रहेगी.
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