न्यूज़11 भारत
रांची/डेस्क: झारखंड हाईकोर्ट ने हजारीबाग (पश्चिमी वन प्रमंडल) के सहायक वन संरक्षक (ACF) अविनाश कुमार परमार के खिलाफ चल रही विभागीय कार्रवाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. गुरुवार को न्यायमूर्ति जस्टिस आनंदा सेन की अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब किया.
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद उस समय सामने आया जब परमार ने अपने ही विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर भ्रष्टाचार को संरक्षण देने और उन्हें प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप लगाए. इन आरोपों को लेकर उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया, जिसके बाद अदालत ने विभागीय कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी.
याचिका में गंभीर आरोप
परमार ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि उनकी अंतरिम जांच रिपोर्ट को संबंधित वन संरक्षक द्वारा करीब पांच महीने तक दबाकर रखा गया. उन्होंने इसे जांच प्रक्रिया में देरी और पारदर्शिता की कमी का उदाहरण बताया.
जांच प्रक्रिया पर सवाल
याचिका में यह भी कहा गया कि क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक रवींद्र नाथ मिश्रा के निर्देश पर वन संरक्षक ममता प्रियदर्शी ने उसी अधिकारी से जांच रिपोर्ट की समीक्षा कराई, जिसके खिलाफ परमार ने पहले जांच समिति गठित की थी. इस कदम पर निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए गए हैं.
नियमों के उल्लंघन का आरोप
परमार ने आरोप लगाया कि डीएफओ मौन प्रकाश ने संयुक्त जांच समिति की रिपोर्ट में पर्यावरणीय अनुमति (EC) का हवाला देते हुए वन संरक्षण (FC) नियमों के उल्लंघन को उचित ठहराया, जबकि EC में स्पष्ट रूप से FC को मान्यता नहीं दी गई थी.
केंद्र की रिपोर्ट का हवाला
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि भारत सरकार के क्षेत्रीय कार्यालय ने भी FC उल्लंघन की पुष्टि की थी. जांच समिति के दोनों सदस्यों पर कार्रवाई की सिफारिश की गई थी, लेकिन प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने केवल एक अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई का सुझाव दिया.
ये भी पढ़ें- जैप जवान अंजन विश्वकर्मा हत्याकांड: झारखंड हाईकोर्ट ने खारिज की अमजद गद्दी की जमानत याचिका