पलामू में गर्भवती शिक्षिका के पेट में ही थमी मासूम की सांसें, पति ने लगाया छुट्ट...

छुट्टी के बदले रिश्वतखोरी

पलामू में गर्भवती शिक्षिका के पेट में ही थमी मासूम की सांसें, पति ने लगाया छुट्टी के बदले रिश्वतखोरी का आरोप

पलामू जिले के शिक्षा विभाग में एक अत्यंत दुखद एवं संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां समय रहते छुट्टी न मिलने और लगातार यात्रा के दबाव के कारण एक गर्भवती शिक्षिका के पेट में ही अजन्मे बच्चे की मौत हो ग

पलामू में गर्भवती शिक्षिका के पेट में ही थमी मासूम की सांसें पति ने लगाया छुट्टी के बदले रिश्वतखोरी का आरोप

न्यूज11 भारत 
पलामू/डेस्क:
पलामू जिले के शिक्षा विभाग में एक अत्यंत दुखद एवं संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां समय रहते छुट्टी न मिलने और लगातार यात्रा के दबाव के कारण एक गर्भवती शिक्षिका के पेट में ही अजन्मे बच्चे की मौत हो गई. इस घटना के बाद हजारीबाग जिला पुलिस विभाग में कार्यरत पीड़िता के पति ने विभाग पर छुट्टी स्वीकृत करने के बदले रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप लगाया है, वहीं दूसरी ओर जिला शिक्षा पदाधिकारी ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए आवेदन प्रक्रिया में तकनीकी त्रुटि को कारण बताया है.

पीड़ित पति मुकेश कुमार तिवारी, जो स्वयं हजारीबाग में पुलिस विभाग में कार्यरत हैं, ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि उनकी पत्नी भारती पांडे पलामू जिले के राजवाड़ी, चैनपुर की निवासी हैं और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय चैनपुर में प्लस टू शिक्षिका के पद पर कार्यरत हैं. उनकी पत्नी नौ माह की पूर्ण गर्भवती थीं और डॉक्टरों द्वारा प्रसव के लिए 4 अगस्त की संभावित तिथि निर्धारित की गई थी. चिकित्सीय सलाह और बिगड़ती शारीरिक स्थिति को देखते हुए 3 जुलाई को जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय में अवकाश हेतु आवेदन जमा किया गया था.

मुकेश तिवारी का आरोप है कि आवेदन जमा करने के उपरांत जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय के लिपिक के माध्यम से छुट्टी स्वीकृत करने के एवज में 50 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की गई. उन्होंने अपनी लाचारी व्यक्त करते हुए संबंधित कर्मचारियों से गुहार लगाई कि वे वर्तमान में इतने बड़े पैसे का भुगतान करने में असमर्थ हैं क्योंकि उनके वृद्ध पिता कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं और मुंबई में उनका इलाज चल रहा है. उन्होंने 25 से 30 हजार रुपये तक देने की विवशता जताई थी, किंतु विभागीय स्तर पर कोई राहत नहीं दी गई और उन्हें बार-बार दौड़ाया जाता रहा.

मुकेश कुमार तिवारी ने कहा कि नौकरी रहे या न रहे, जान बचेगी तो मिट्टी काटकर भी पेट भर लेंगे... इसी सोच के साथ पत्नी को अस्पताल ले गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी

जब रिश्वत न देने के कारण छुट्टी का मामला लगातार लटकाया जाता रहा, तब हजारीबाग पुलिस विभाग में सेवारत पीड़ित पति शिक्षक संघ के पदाधिकारियों अजय मेहता, रिंकू गुप्ता एवं सतीश द्विवेदी के साथ पलामू के उपायुक्त से मिले थे. उपायुक्त ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल अपने सामने ही अधिकारियों को दूरभाष पर निर्देश दिया कि मामले का तुरंत निष्पादन कर उन्हें सूचित किया जाए. इसके बावजूद अगले दिन जब पीड़ित पुनः शिक्षा विभाग के कार्यालय पहुंचे तो अधिकारी टालमटोल की नीति अपनाते हुए समय बिताते रहे.

लगातार अवकाश न मिलने के कारण शिक्षिका को असह्य पीड़ा की स्थिति में भी प्रतिदिन घर से 35 किलोमीटर दूर विद्यालय आना-जाना पड़ रहा था. घटना वाले दिन स्थिति अत्यंत बिगड़ गई और शिक्षिका दर्द से तड़पने लगीं. कोई अन्य उपाय न देखकर उनके पति नौकरी और नियम-कानून की चिंता छोड़ पत्नी को तत्काल अस्पताल ले गए, जहां अल्ट्रासाउंड जांच के बाद चिकित्सकों ने अत्यंत दुखद सूचना देते हुए बताया कि गर्भस्थ शिशु की पेट के अंदर ही मृत्यु हो चुकी है.

दूसरी ओर, इस पूरे मामले पर जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) संदीप कुमार ने अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया है कि विभाग पर लगाए गए रिश्वत के तमाम आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद और निराधार हैं. डीईओ संदीप कुमार ने बताया कि संबंधित शिक्षिका ने मातृत्व अवकाश का कोई आवेदन विभाग में जमा ही नहीं किया था, बल्कि उन्होंने 13 तारीख को चाइल्ड केयर लीव (बाल देखभाल अवकाश) का आवेदन दिया था, जिसे स्वीकृत कर दिया गया है.

डीईओ ने जानकारी दी कि मातृत्व अवकाश का आवेदन न मिलने के कारण विभाग को यह जानकारी ही नहीं थी कि शिक्षिका गर्भवती हैं. इसी वजह से तुरंत छुट्टी मिलने में प्रक्रियात्मक परेशानी हुई. उन्होंने कहा कि यदि शिक्षिका गर्भवती थीं तो उन्हें चाइल्ड केयर लीव के बजाय मातृत्व अवकाश या फिर अपनी बची हुई अन्य छुट्टियों के लिए आवेदन करना चाहिए था. उन्होंने पैसे मांगने के आरोपों को पूरी तरह नकारते हुए कहा कि विभागीय प्रक्रिया नियमों के तहत ही संचालित हो रही थी.

बहरहाल, प्रक्रियागत खामियां और आरोप-प्रत्यारोप जो भी हों, लेकिन यह एक बेहद दुखद और दर्दनाक घटना है. समय रहते उचित चिकित्सा और आराम न मिल पाने के कारण एक गर्भवती शिक्षिका को अपने अजन्मे बच्चे को खोना पड़ा और एक मासूम जिंदगी मां के गर्भ में ही सदा के लिए शांत हो गई.

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