विद्या शर्मा/न्यूज11 भारत
जादूगोड़ा/डेस्क: माझी परगना माहाल बाखुल, पावड़ा, घाटशिला में परगना, बाबा माझी बाबा एवं समाज के प्रतिनिधियों का बैठक देश परगना बाबा बैजू मुर्मू के अध्यक्षता में संपन्न हुई. बैठक में मुख्य रूप से झारखंड सरकार द्वारा अधिसूचित पेसा नियमावली 2025 के विषय पर चर्चा किया गया जहां माझी परगना महाल (आदिवासी पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था) ने राज्य सरकार का पेसा कानून लागू करने पर धन्यवाद व आभार जताया जबकि कई बिंदुओं पर आपत्ति जताई.
इस मौके पर देश परगना बैजू मुर्मू ने कहा कि यह नियमावली पेसा 1996 का अनुरूप नहीं है.इस नियमावली में ग्राम सभा के शक्ति को कम और अधिकार को ज्यादा हनन किया गया है. आदिवासियों के हितों को नजरंदाज किया गया है.नियमावली में कई त्रुटियां हैं जिस पर पारंपरिक आदिवासी स्वशासन व्यवस्था को आपत्ति है.उन्होंने सरकार से मांग की नियमावली में त्रुटियों की आवश्यक सुधार किया जाए.
उन्होंने आरोप लगाया किनियमावली में ग्राम सभा की शक्तियों को कमजोर किया गया है एवं पंचायत राज व्यवस्था को और जिला प्रशासन को महत्व दिए गए हैं. नियमावली में मुख्य त्रुटियां जैसे- ग्राम पंचायत की कार्यकारिणी सदस्य से अभिप्रेत किया है ग्राम पंचायत स्तर पर निर्वाचित मुखिया एवं वार्ड सदस्य. पारंपरिक ग्राम सभाओं की सीमांकन , मान्यता प्रकाशन एवं गठन की जिम्मेदारी उपायुक्त को दी गई है.
ग्राम सभा की विशेष बैठाक बुलाने का व्यवस्था करने की क्या जरूरत थी, जिसका अधिकार मुखिया , पंचायत समिति, जिला परिषद के मुख्य कार्यपालक अभियंता अधिकारियों को दिया गया है. इसमें ग्राम पंचायत का मुखिया इस नियम के अधीन विशेष बैठक बुलाई जाने के लिए जिम्मेदारी सौंपी गई हैं. सामाजिक संसाधनों का प्रबंध में भी ग्राम सभा को विभिन्न अधिनियम अथवा कानून को शर्तों के साथ थोपा गया है. परंपराओं का संरक्षण एवं विवादों का निपटारा में भी ग्राम सभा के शक्ति को शून्य किया गया हैं, पारंपरिक ग्राम सभा के निर्णय से किसी असंतुष्ट पक्षकार को वैधानिक प्रक्रिया द्वारा सक्षम न्यायालय जाने के लिए स्वतंत्र रखा गया है मगर न्यायालय एवं थाना असंतुष्ट पक्षकार का अपील पर कार्रवाई करने से पहले पुलिस द्वारा सामान्य नियम प्रक्रिया के अनुसार कार्यवाही शुरू करने से पहले मामले से संबंधित पूरी जानकारी के लिए ग्राम सभा से संपर्क करेगी और उसके बाद ही आगे की कार्रवाई करने का निर्देश होना चाहिए.
पुलिस द्वारा किसी को गिरफ्तार करने से पहले ग्राम सभा कि अनुमति लेने कि अनिवार्य किया जाना चाहिए.उन्होंने जानकारी दी कि ग्राम सभा को डीएमएफ टी फंड एवं टी एस पी में अधिकार नहीं दिया है. हस्तांतरित भूमि की वापसी में ग्राम सभा के अंतिम निर्णय को स्थापित नहीं किया गया है. कब्जाधारी को न्यायालय जाने से रोका नहीं गया है. ऐसे कई सारे त्रुटियां हैं इसलिए नियमावली को सुधार करते हुए पेसा कानून 1996 के अनुरूप ग्राम सभा को प्रदत्त शक्तियों को हुबहू शामिल करने कि आवश्यकता है. साथ ही जिला प्रशासन द्वारा असंवैधानिक रूप से गैर आदिवासियों को बनाए ग्राम प्रधानों को पद मुक्त करें.
पेसा कानून का लाभ पंचमी क्षेत्र में रह रहे गैर आदिवासियों को भी मिलेगा एवं ग्राम सभा को सशक्त बनाने में अहम भूमिका रहेगी. उन्होंने आगे कहा कि पांचवी अनुसूचित जिलों में असंवैधानिक रूप से गठित नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत को अविलंब निरस्त करें एवं पेसा नियमावली को पांचवी अनुसूचित क्षेत्र में पूर्ण रूप से काम करने का अधिकार मिले. नियमावली को संशोधन करने के लिए देश पारगना बाबा के नेतृत्व में 10 सदस्यों का कमेटी गठित किया गया. संशोधन प्रारुप तैयार कर माझी पारगना माहाल पारंपरिक स्वसाशन व्यवस्था का प्रतिनिधिमंडल बहुत जल्द महामहिम माननीय मुख्यमंत्री, आदिवासी कल्याण मंत्री, पंचायती राज मंत्री सहित सचिवों से मुलाकात करेंगे.
बैठक में मुख्य रूप से तोरोप पारगना बाबा हरिपोदो मुर्मू, दसमत हांसदा, बैजू टुडू, पारगना आयो पुन्ता मुर्मू, पद्मावती हेंम्ब्रोम, लखन मार्डी, देश पारानिक दुर्गा चरन मुर्मू, जायरेत बिरेन टुडू, मार्शल मुर्मू, छोटा भुजांग टुडू, सत्रुघन मुर्मू, सुशांत हेंम्ब्रोम, सुकुमार सोरेन, कारु मुर्मू, जगदिश बास्के, गन्साराम टुडू, मानिक हांसदा, अधिपति मंडी, श्याम टुडू, बैधनाथ सोरेन, जितराई किस्कू, बिन्दे सोरेन, सुनाराम सोरेन, कामेश्वर सोरेन, रातुलाल टुडू, सुबोध हांसदा, सुनिल हेंम्ब्रोम, बिपिन चंद्र मुर्मू, बिर्जन मुर्मू, धार्मा मुर्मू, फागुलाल किस्कू आदि काफी संख्या में समाज के प्रतिनिधि उपस्थित थे.
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