हाई कोर्ट

सड़क हादसे में मृत ट्रेलर चालक का मुआवजा हाई कोर्ट ने बढ़ाया, 22.16 लाख से बढ़ाकर 28.17 लाख किया

झारखंड हाईकोर्ट ने सड़क हादसे में मृत ट्रेलर चालक के परिजनों को बड़ी राहत देते हुए मुआवजे की राशि बढ़ाकर 28.17 लाख रुपये कर दी है.

By : Ark Sahuliyar
सड़क हादसे में मृत ट्रेलर चालक का मुआवजा हाई कोर्ट ने बढ़ाया, 22.16 लाख से बढ़ाकर 28.17 लाख किया

न्यूज़11 भारत 
रांची/डेस्क:
झारखंड हाईकोर्ट ने सड़क हादसे में मृत ट्रेलर चालक के परिजनों को बड़ी राहत देते हुए मुआवजे की राशि बढ़ाकर 28.17 लाख रुपये कर दी है. मुख्य न्यायाधीश एम एस सोनक की कोर्ट ने बीमा कंपनी की अपील खारिज करते हुए कहा कि मृतक पर बिना लाइसेंस वाहन चलाने या हादसे में उसकी लापरवाही का आरोप साबित नहीं हुआ है. मामला जमशेदपुर के मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के 30 मार्च 2024 के फैसले से जुड़ा था. अधिकरण ने मृतक के परिवार को 22,16,475 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था.

बिना लाइसेंस वाहन चलाने का आरोप अपील में पहली बार उठाया
बीमा कंपनी की ओर से दलील दी गई कि मृतक मुकेश कुमार चौधरी बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के ट्रेलर चला रहा था, इसलिए बीमा कंपनी को मुआवजा देने की जिम्मेदारी से मुक्त किया जाना चाहिए. हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया. कोर्ट ने कहा कि यह आरोप ट्रिब्यूनल के सामने दाखिल लिखित बयान में नहीं लिया गया था और इस मुद्दे पर कोई मुद्दा भी तय नहीं हुआ था. इसके अलावा मृतक का ड्राइविंग लाइसेंस रिकॉर्ड में पेश किया गया था. ऐसे में अपील के स्तर पर पहली बार यह नया तथ्य उठाकर बीमा कंपनी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती.

हेड-ऑन टक्कर मात्र से मृतक को दोषी नहीं माना जा सकता
हादसा 31 मई 2022 को छोटूरमा हट्टाला के पास हुआ था. मृतक मुकेश कुमार चौधरी ट्रेलर नंबर JH-05BK-4041 चला रहे थे, जिसकी ट्रेलर नंबर NL-01AD-5697 से टक्कर हुई. हादसे के बाद मुकेश कुमार चौधरी को बंशागार अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया. मामले में एफआईआर दर्ज हुई और दूसरे ट्रेलर के चालक रोहित कुमार के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया था.

बीमा कंपनी ने इसे आमने-सामने की टक्कर बताते हुए मृतक की भी contributory negligence यानी सहायक लापरवाही मानने की मांग की थी. लेकिन हाईकोर्ट ने कहा कि सिर्फ हेड-ऑन टक्कर होने से मृतक की लापरवाही साबित नहीं होती. रिकॉर्ड में मृतक की लापरवाही साबित करने वाला कोई स्वतंत्र साक्ष्य नहीं था. बीमा कंपनी का गवाह भी हादसे का प्रत्यक्षदर्शी नहीं था.

मृतक की आय 11,997 से बढ़ाकर 16 हजार रुपये मानी
हाईकोर्ट ने मुआवजे की गणना के लिए मृतक की मासिक आय 16,000 रुपये तय की. ट्रिब्यूनल ने आय 11,997 रुपये मासिक मानी थी, जबकि परिजनों ने 1,000 रुपये प्रतिदिन मजदूरी और 500 रुपये प्रतिदिन भोजन के रूप में मिलने का दावा किया था. कोर्ट ने 45 हजार रुपये मासिक आय के दावे को पर्याप्त दस्तावेजी साक्ष्य के अभाव में स्वीकार नहीं किया, लेकिन यह भी कहा कि केवल न्यूनतम मजदूरी को ही वास्तविक आय मान लेना उचित नहीं होगा.

कोर्ट ने मृतक की उम्र करीब 41 वर्ष मानते हुए 14 का multiplier लागू किया और भविष्य की संभावनाओं के लिए 25 प्रतिशत की वृद्धि की. मृतक के पीछे पत्नी, चार नाबालिग बच्चे और मां समेत छह आश्रित थे. इसलिए व्यक्तिगत खर्च के लिए एक-चौथाई राशि घटाई गई.

इस गणना के आधार पर loss of dependency 25.20 लाख रुपये हुआ. छह पात्र दावेदारों को consortium के लिए कुल 2.64 लाख रुपये, जबकि funeral expenses और loss of estate के लिए 16,500-16,500 रुपये निर्धारित किए गए. इस तरह कुल मुआवजा 28.17 लाख रुपये तय हुआ.

बिना क्रॉस-अपील भी मुआवजा बढ़ाने का अधिकार
बीमा कंपनी ने यह भी दलील दी कि दावेदारों ने अलग से अपील या cross-objection दाखिल नहीं किया है, इसलिए हाईकोर्ट मुआवजा नहीं बढ़ा सकता. कोर्ट ने इस आपत्ति को खारिज कर दिया. हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के बाद के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि मोटर वाहन कानून के तहत अदालत का दायित्व just compensation यानी उचित मुआवजा सुनिश्चित करना है. इसलिए यदि ट्रिब्यूनल का मुआवजा उचित नहीं है तो अपीलीय अदालत उसे बढ़ा सकती है, भले ही दावेदारों ने अलग अपील या क्रॉस-ऑब्जेक्शन दाखिल न किया हो.

बीमा कंपनी को आठ सप्ताह में राशि जमा करने का आदेश
हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी की अपील खारिज करते हुए मुआवजा 22,16,475 रुपये से बढ़ाकर 28,17,000 रुपये कर दिया. इस राशि पर 30 सितंबर 2022 से वास्तविक भुगतान तक 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज जारी रहेगा. पहले से जमा राशि को समायोजित किया जाएगा. अदालत ने बीमा कंपनी को फैसले की तारीख से आठ सप्ताह के भीतर संबंधित ट्रिब्यूनल में राशि जमा करने का निर्देश दिया है. नाबालिग बच्चों के हिस्से और राशि के वितरण को लेकर ट्रिब्यूनल के पहले के निर्देश लागू रहेंगे.

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