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रांची/डेस्क: 'धनबाद का लाला', 'धनबाद का सबसे बड़ा कोयला दलाल' नामों से कुख्यात कोयला तस्कर आखिरकर अनिल गोयल बुरी तरह से ईडी के चंगुल में फंस गया है. ताजा खबरें यह भी आयी हैं कि दुबड़ा में JCPL के 5 से अधिक हार्ड कोक प्लांटों पर ईडी ने फिर दबिश दे दी है. इतना ही नहीं, इससे पहले भी ईडी ने धनबाद में जो छापेमारी की है और धनबाद कोयला तस्करी को लेकर उसके हाथ जो दस्तावेज लगे हैं, उससे अब अनिल गोयल का बचना मुश्किल लग रहा है. ईडी के हाथ लगे सुबूत ऐसे हैं, जो अनिल गोयल पर न सिर्फ भारी पड़ने वाले हैं. बल्कि उसने अपने रसूख के बल पर कोयले के काले कारोबार का जो साम्राज्य खड़ा कर लिया था, उसका ढहना तय लग रहा है.
अनिल गोयल के कोयले का काला साम्राज्य खड़ा करने की कहानी
कोयले के काले कारोबार के शिखर पर खड़े अनिल गोयल की कहानी पश्चिम बंगाल के पुरुलिया से शुरू होती है. पुरुलिया में एक जगह है दुबड़ा, यहीं से छोटी-मोटी कोयले की चोरियों से शुरू करके ही एक दिन वह धनबाद का लाला बन बैठा. अनूप मांझी ऊर्फ लाला के साथ व्यापारिक साठगांठ कर अनूप गोयल ने कोयले अवैध कारोबार की शुरुआत की थी और देखते ही देखते उसका यह काला कारोबार धनबाद आ पहुंचा और वह कब कोयलांचला का लाला बन बैठा किसी को पता ही नहीं चला.
धनबाद में कोयले के काले कारोबार के उसके दो ठिकाने थे, पहला- तितुलिया हार्ड कोक प्लांट और दूसरा महुधा हार्ड कोक प्लांट. इन दोनों कोक प्लांट के लिए चोरी का कोयला खरीदना शुरू किया. उसका यह अवैध कारोबार कुछ ऐसा फल-फूल गया कि वह धनबाद कोयला चोरी सिंडिकेट का बेताज बादशाह बन गया. अवैध कमाई इतनी कि हजारों करोड़ तक जा पहुंची.
अपने गुर्गों के नाम 10 हार्ड कोक प्लांट लेकर फैलाया काला कारोबार
अनिल गोयल ने कोयला का काला धंधा पूरी योजना बनाकर दूर-दूर तक फैलाया. उसने अपने गुर्गों और सहयोगियों के नाम पर 10 हार्ड कोक प्लांट ले रखा था. इन कोक प्लांट के सहारे उसने अवैध कोयले का कारोबार शुरू किया. अनिल गोयल के काले धंधे के जितने भी किरदार अब तक सामने आये हैं, उनमें एक नाम दीपक पोद्दार का नाम भी सामने आया है. दीपक पोद्दार का साथ मिलने के बाद उसका अवैध कारोबार खूब आगे बढ़ गया. इसी कड़ी में धनबाद एसपी संजीव कुमार जब अनिल गोयल से जुड़े तब यह धंधा लाखों टन की कोयले की चोरी में बदल गया और मुनाफा हजारों करोड़ में. अनिल गोयल का अवैध कारोबार सिर्फ धनबाद तक ही सीमित नहीं था, बल्कि उसने अपना कारोबार बोकारो तक फैला रखा था.भाड़े को भट्टों के लिए औने-पौने भाव में कोयला खरीद कर अकूत धन इकट्ठा किया.
ऊंची पहुंच के बल पर ऊंचाई पर पहुंचा अनिल गोयल
अनिल गोयल की ऊंची पहुंच की भी कई कहानियां हैं. अनिल गोयल न धनबाद में न सिर्फ कोयले की रेट क्या होगी, यह तय करता था, बल्कि पुलिस के आला अधिकारियों की ट्रांसफर पोस्टिंग में भी उसकी खूब चलती थी. अनिल गोयल के रसूख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह यह भी तय करता था कि 'धनबाद का एसपी' कौन होगा. जिले के छोटे अधिकारियों को तो वह कुछ समझता ही नहीं था.
एसपी संजीव कुमार और अनुराग गुप्ता से 'रिश्तों' से परवान चढ़ी बादशाहत
इतना बड़ा अवैध कारोबार बिना आला अधिकारियों की मदद से परवान नहीं चढ़ सकता था. और यह सच भी है, उसके इस काले कारोबार को कोयले के खदान से आसमान तक पहुंचाने में न सिर्फ एसपी संजीव कुमार, बल्कि झारखंड के डीजीपी रहे अनुराग गुप्ता का भी बड़ा योगदान रहा. इन दोनों आला अधिकारियों से धनबाद के लाला के रिश्ते काफी प्रगाढ़ रहे हैं. जिनके बल पर उसने धनबाद में कोयले की लूट मचा दी. तीन सालों में अनिल गोयल ने धनबाद का इतना कोयला लूटा कि हजारों करोड़ रुपयों का काला कारोबार उसने कर डाला.
अनिल गोयल अपना यह काला कारोबार पूरा खम ठोंक कर करता था. यह इस बात से अच्छी तरह से समझा जा सकता है कि उसका एक फेवरेट डायलॉग हुआ करता था- 'कोयला लाओ हम खा जायेंगे'.
लाला अब आया ईडी के चपेट में
कहा जाता है ऊंट एक न एक दिन पहाड़ के नीचे आ ही जाता है. वहीं अब अनिल गोयल ऊर्फ धनबाद के लाला के साथ हुआ है. पिछले तीन दिनों से ईडी ने कोयले के कारोबारियों की ईंट से ईंट बजा कर रख दी है, इसकी सबसे बड़ी चोट अनिल गोयल को लगी है. ईडी अपनी लम्बी छापेमारी में के बाद कई कार्टून दस्तावेज अपने साथ ले गयी है. अनिल गोयल के गुर्गों के पास से ढेरों कागजी और डिजिटल दस्तावेज मिले हैं. इन दस्तावेजों से धनबाद के लाला के कोयले के साम्राज्य में भूचाल आना तय है. ऊपर से आज दुबड़ा में ईडी ने फिर से जो कार्रवाई शुरू की है, उससे यही कहा जायेगा- 'बकरे की अम्मा कब तक खैर मनायेगी'.
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