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रांची/डेस्क: झारखंड बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि रांची में आयोजित ईसाई महाजुटान ने कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा के राजनीतिक गठबंधन की असलियत सामने ला दी है. जिस कार्यक्रम को आदिवासी समाज की एकता का महाजुटान बताया गया, उसमें कांग्रेस के साथ खड़े होने का दावा करने वाले झामुमो का कोई बड़ा नेता मंच में उपस्थित नहीं था. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किए जाने के बावजूद वे स्वयं कार्यक्रम में नहीं पहुंचे और उनकी ओर से सिर्फ पार्टी के एक विधायक को भेजा गया.
प्रतुल ने कहा कि कहीं मुख्यमंत्री जी इस बात से नाराज तो नहीं थे कि झारखंड में धर्मांतरित आदिवासियों ने पारंपरिक पद्धति मानने वाले आदिवासियों के अधिकार को छीन लिया है.आदिवासियों की आबादी पिछली जनसंख्या सर्वे के अनुसार 26% थी. धर्मांतरित आदिवासियों की संख्या सिर्फ 4% थी. यानी धर्मांतरित आदिवासी कुल आदिवासियों की जनसंख्या का लगभग 15 % है. फिर भी राज्य की 28 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों में 11 ईसाई आदिवासी विधायक हैं.यानी सिर्फ 15% धर्मांतरित आदिवासियों ने आदिवासियों के लिए आरक्षित विधानसभा सीटों के 40% हिस्से पर कब्जा करके रखा है. अब राहुल गांधी ' जिसकी जितनी आबादी, उसकी इतनी हिस्सेदारी' के अपने ही नारे को भूल गए हैं.
प्रतुल शाहदेव ने कहा कि कल की रैली कांग्रेस की ईसाई रैली थी, आदिवासी महारैली नही. भाजपा आदिवासी समाज को वोट बैंक नहीं, बल्कि झारखंड की अस्मिता और विकास का अभिन्न हिस्सा मानती है. कांग्रेस चाहे जितने राजनीतिक महाजुटान कर लें, आदिवासी समाज अब नारों से नहीं, काम के आधार पर फैसला करेगा.
आर्च बिशप के फतवा पर कांग्रेस की चुप्पी संदेहास्पद
प्रतुल ने कहा आर्च बिशप ने बाकायदा फतवा के समान पत्र जारी करके सभी ईसाइयों, फादर, ब्रदर सिस्टर को रैली में हिस्सा लेने का आदेश दिया. यह भी कहा कि यह अनुरोध नहीं आदेश है. धर्मगुरुओं का दुरुपयोग करने का कांग्रेस का पुराना इतिहास रहा है. कभी वह कांग्रेस कोवोट देने के लिए जामा मस्जिद के शाही इमाम बुखारी से फतवा जारी करवाती थी.अब इस श्रृंखला में अपने राजनीतिक दुरुपयोग के लिए ईसाई धर्म गुरुओं को भी जोड़ लिया.
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