न्यूज11 भारत
लोहरदगा/डेस्क: कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) लोहरदगा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. किरण सिंह ने किसानों के लिए मौसम आधारित कृषि परामर्श जारी किया है. उन्होंने किसानों से बोआई और रोपाई कार्यों में संभावित वर्षा का लाभ उठाने की अपील करते हुए खेतों की मेड़ों को मजबूत करने, वर्षा जल संचयन के लिए डोभा निर्माण करने तथा निचले खेतों में जल निकासी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने की सलाह दी है. साथ ही खाद का प्रयोग बारिश की संभावना को ध्यान में रखकर करने को कहा गया है, ताकि पोषक तत्वों का नुकसान कम हो.
डॉ. किरण ने अरहर की बुआई के लिए खेत तैयार करने तथा प्रमाणित स्रोत से बीज खरीदने की सलाह दी है. बीजों को राइजोबियम एवं फास्फोरस घुलनशील जीवाणु से उपचारित कर बुवाई करने से अंकुरण एवं उत्पादन में वृद्धि होती है. किसानों को एलआरजी-41, बिरसा अरहर-1, नरेंद्र अरहर-1 एवं 2, बहार तथा आईसीपीएच-2671 जैसी उन्नत किस्मों का चयन करने की सलाह दी गई है. वहीं धान की नर्सरी की देखभाल जारी रखने तथा पर्याप्त नमी वाले क्षेत्रों में 20 से 25 दिन की पौध की रोपाई शुरू करने को कहा गया है. जिन क्षेत्रों में पानी की कमी है, वहां नर्सरी प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने और आवश्यकता पड़ने पर कम एवं मध्यम अवधि वाली धान की किस्मों का उपयोग करने की सलाह दी गई है.
मक्का एवं सब्जी फसलों के लिए भी विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है. मक्का में जल निकासी की समुचित व्यवस्था, खरपतवार नियंत्रण तथा पर्याप्त नमी होने पर ही नाइट्रोजन की टॉप ड्रेसिंग करने को कहा गया है. सब्जियों में जल-जमाव से बचाव, रोग प्रबंधन तथा टमाटर में अर्ली ब्लाइट, लेट ब्लाइट एवं बैक्टीरियल विल्ट जैसी बीमारियों की नियमित निगरानी की सलाह दी गई है. भिंडी में येलो वेन मोज़ेक वायरस के नियंत्रण के लिए नीम तेल का छिड़काव अथवा पीले चिपचिपे ट्रैप के उपयोग की अनुशंसा की गई है.
यह भी पढ़ें: कुटमु में पीसीसी सड़क निर्माण पर उठे सवाल, अंग्रेजी शराब दुकान की बगल में बनी सड़क की गुणवत्ता पर ग्रामीणों में नाराजगी