मुमताज अहमद/न्यूज11 भारत
खलारी/डेस्क: खलारी. सीसीएल एनके एरिया की केडीएच परियोजना खदान से सटे करकट्टा आवासीय कॉलोनी के समीप शुक्रवार की दोपहर अचानक हुए भू-धंसान से फिर से एक बार अफरा-तफरी माहौल बन गया. जमीन का बड़ा हिस्सा धंसकर खदान की ओर समा गया और तेज धमाके जैसी आवाज के साथ धुआं उठने लगा. लोग घरों से बाहर निकल आए. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शुक्रवार की दोपहर करीब 2 बजे एक ही समय में तीन बार भू-धसांन हुआ. घटना के समय मंजर बेहद भयावह था. भू-धंसान के साथ ही धुंआ और धुल का गुब्बार उड़ने लगा और करकट्टा कॉलोनी को ढक दिया. इस दौरान वहां ठेका कार्य करे मजदूर भी बाल-बाल बच गए. अगर कुछ सेकेंड की भी देर होती तो बड़ा हादसा हो सकता था. लगातार हो रही भू-धंसान की घटनाओं ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है. घटना के बाद स्थानीय लोगों ने कहा कि वह लोग काफी दहशत में जीने को मजूबर है. करकट्टा निवासी हरेश कुमार सिंह ने बताया कि इधर कुछ दिनों से लगातार हो रहे भू-धंसान से करकट्टा खदान के आसपास व्यक्ति डर-डर के जीवन जी रहे हैं. खदान के समीप जमीन धंस चुकी है और वहां से धुआं निकल रहा था. लगातार जमीन में दरारें पड़ रही हैं. अब हालात ऐसे हैं कि हर वक्त जान माल के साथ हादसे का डर बना रहता है. सुरक्षा मानकों का पालन नहीं होने से ग्रामीण भय के साये में जीने को मजबूर हैं. भू-धसान ने करकट्टा कॉलोनी के लोगों को असुरक्षा और अनिश्चितता के दौर में लाकर खड़ा कर दिया है. अब सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार सीसीएल अधिकारी समय रहते ठोस कदम उठाएंगे या फिर किसी बड़े हादसे के बाद ही व्यवस्था जागेगी.
हक और अधिकार छीने जा रहे : रतिया गंझू
घटना को लेकर आक्रोश व्यक्त करते हुए के बिहार कोलियरी कामगार यूनिय (सीटु) जोनल अध्यक्ष रतिया गंझू ने कहा कि सीसीएल विस्थापितों के हक और अधिकार को छीनने का काम कर रही है. प्रबंधन और अंचल का सुस्त रवैया किसी भी दिन बड़े हादसे का कारण बन सकता है. पहले लोगों को सुरक्षित बसाना चाहिए था, उसके बाद ही कोयला उत्पादन होना चाहिए था. यहां उल्टा हो रहा है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो ग्रामीण बड़ी दुर्घटना का शिकार हो सकते हैं.
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