संतोष श्रीवास्तव/न्यूज़ 11भारत
पलामू/डेस्क: भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय सह राज्य स्तरीय दिशा समिति सदस्य देवेश तिवारी ने प्रेस वर्ता कर झारखंड सरकार पर जम कर निशाना सधा उन्होंने कहा कि झारखंड में अपराध और भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि आम जनता अब भय और असुरक्षा के साये में जीने को मजबूर है. हेमंत सोरेन की सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हो रही है, जिससे राज्य की प्रशासनिक और नैतिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है. पलामू जिला, जिसकी पहचान कभी अपनी प्राकृतिक संपदा से थी, आज बढ़ते अपराध के कारण राष्ट्रीय स्तर पर नकारात्मक चर्चा का केंद्र बन गया है. जिले में साक्षरता, रोजगार और स्वास्थ्य सेवाओं का ग्राफ लगातार नीचे गिर रहा है, जबकि सत्ता के संरक्षण में अपराधियों और भू-माफियाओं का मनोबल सातवें आसमान पर है. युवाओं को शिक्षा और अवसर देने के बजाय संगठित अपराधी उन्हें अवैध गतिविधियों की ओर धकेल रहे हैं, जिससे पलामू का भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है.
सरकारी तंत्र में दोहरे मापदंड और भेदभाव का आलम यह है कि जहां एक ओर पांकी के सैकड़ों छात्रों और हाल ही में नीट परीक्षा के अभ्यर्थियों का भविष्य प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ गया, वहीं दूसरी ओर रसूखदारों के लिए नियमों को ताक पर रखकर विशेष परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं. स्थानीय भाषाओं—भोजपुरी और मगही—को JTET की नियमावली से बाहर रखना पलामू की सांस्कृतिक पहचान पर सीधा प्रहार है. भ्रष्टाचार का आलम यह है कि प्रखंड से लेकर जिला कार्यालयों तक बिना रिश्वत के कोई काम नहीं होता. इसके साथ ही, जिले की सड़कों पर हर दिन हो रही मौतें प्रशासन की संवेदनहीनता को उजागर करती हैं. वर्ष 2019 से 2026 तक पलामू में एक भी नया स्कूल या अस्पताल न बनना यह साबित करता है कि विकास की बातें केवल कागजों तक सीमित हैं और धरातल पर केवल विनाश और बदहाली है.
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