प्रमोद कुमार/न्यूज़11 भारत
बरवाडीह/डेस्क: झारखंड राज्य के आकलन-प्रशिक्षित सहायक अध्यापकों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया है. इसी कड़ी में रविवार को उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय गढ़वाटांड़ परिसर में “झारखंड राज्य आकलन-प्रशिक्षित सहायक अध्यापक संघर्ष मोर्चा” के बैनर तले एक बैठक आयोजित की गई. बैठक में 18 अप्रैल से रांची स्थित मुख्यमंत्री आवास के समक्ष आमरण अनशन शुरू करने की घोषणा की गई. बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिला अध्यक्ष विजय प्रसाद ने राज्य सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि सरकार ने पूर्व में किए गए समझौते के अनुरूप अब तक कोई ठोस पहल नहीं की है. यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो राज्य के करीब 45 हजार सहायक अध्यापक उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे.
राज्य सरकार की उदासीनता की निंदा
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं संघ के प्रदेश महासचिव बबलू सिंह ने भी सरकार के उदासीन रवैये की कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा कि विभागीय आकलन परीक्षा को टेट के समकक्ष मान्यता देने समेत अन्य लंबित मांगों को अविलंब पूरा किया जाना चाहिए. उन्होंने सभी सहायक अध्यापकों से एकजुट होकर आंदोलन को सफल बनाने का आह्वान किया.
मुख्य मांगें
- आकलन परीक्षा को टेट के समतुल्य मान्यता देना
- प्रस्तावित टेट परीक्षा में कट-ऑफ मार्क्स में राहत
- क्षेत्रीय भाषाओं को शामिल करना
- न्यूनतम योग्यता में बदलाव
- ईडब्ल्यूएस को छूट
- संविदा कर्मियों के वेतनमान निर्धारण
- अनुकंपा नियुक्ति लागू करना
- सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष करना
आंदोलन की रूपरेखा
मोर्चा के अनुसार 12 अप्रैल को विधायकों को मांग पत्र सौंपा जाएगा, 14 अप्रैल को जिला स्तरीय बैठक होगी और 18 अप्रैल से मुख्यमंत्री आवास, रांची के समक्ष धरना-प्रदर्शन सह आमरण अनशन शुरू किया जाएगा.
बैठक में इनकी रही उपस्थिति
बैठक में बड़ी संख्या में सहायक अध्यापक एवं अध्यापिकाएं उपस्थित रहे. प्रमुख रूप से अनुज कुमार सिन्हा, अनिल सिंह, डिलेस यादव, सियाराम सिंह, आलोक कुमार, गीता कुमारी, कल्याणी वर्मा, रेनू कुमारी, सुषमा मिंज, शेखावत अली, मो. नौशाद, लाल बिहारी यादव, हरिशंकर यादव, अनिल प्रसाद, राकेश कुमार, अमित कुमार, अमित बोदरा, मुकेश राम, अजय कुमार, महबूब आलम, सुदेश्वर सिंह, जमादार सिंह, पारसनाथ, भोला प्रजापति, नबीजन अंसारी, मैनेजर सिंह, रामधार सिंह सहित सैकड़ों लोग मौजूद थे.
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