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रांची/डेस्क: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की सुरक्षा को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया हैं. उनकी सुरक्षा संभाल रही केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर शिकायत की है कि राहुल गांधी ने 'येलोबुक प्रोटोकॉल' का पालन नहीं किया. अब इस पर ये सवाल उठने लगे है कि आखिर यह येलोबुक है क्या और क्यों इसे फॉलो करना जरूरी हैं.
क्या है येलो बुक?
गृह मंत्रालय की ओर से वीवीआईपी सुरक्षा को लेकर बनाए गए सभी नियम और गाइडलाइंस एक पुस्तिका में दर्ज रहते है, जिसे येलोबुक कहा जाता हैं. राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को छोड़कर देश की तमाम बड़ी हस्तियों की सुरक्षा इसी येलोबुक में दिए प्रोटोकॉल के आधार पर तय होती हैं.
येलोबुक से ही तय होती है अलग-अलग सुरक्षा कैटेगरी
येलोबुक में अलग-अलग सुरक्षा स्तरों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए हैं. इनमें Z+, Z, Y और X कैटेगरी की सुरक्षा शामिल होती हैं. किसे किस स्तर की सुरक्षा दी जानी है, इसका आकलन आतंकवादियों, उग्रवादी संगठनों या संगठित अपराधियों से मिलने वाले संभावित खतरे के आधार पर किया जाता हैं. इस प्रोटोकॉल के तहत वीवीआईपी को अपनी सभी गतिविधियों और मूवमेंट्स की जानकारी सुरक्षा एजेंसियों को देनी होती हैं. ताकि जोखिम के हिसाब से सुरक्षा इंतजाम पुख्ता किए जा सकें. सुरक्षा बलों और सुरक्षा पाने वाले व्यक्ति, दोनों के लिए इन नियमों का पालन करना जरूरी होता हैं.
राहुल गांधी पर आरोप है कि उन्होंने इन प्रोटोकॉल्स का पूरी तरह पालन नहीं किया, जिससे सुरक्षा जोखिम बढ़ सकता हैं. यही वजह है कि इस समय येलोबुक एक बार फिर सुर्खियों में हैं.
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