धनु संक्रांति के साथ शुरू हो रहा खरमास, एक मास वर्जित रहेंगे सभी शुभ कार्य

By : Pramod Kumar
धनु संक्रांति के साथ शुरू हो रहा खरमास, एक मास वर्जित रहेंगे सभी शुभ कार्य

न्यूज11  भारत

रांची/डेस्क:  भारतीय पंचांग में राशि और संक्रांति का विशेष महत्व होता है. एक साल तक सूर्य बारह राशियों में प्रवेश करते हैं. सूर्य के एक राशि से दूसरे राशि में प्रवेश करने के काल को ही संक्रांति कहा जाता है. कल यानी 16 दिसम्बर को सूर्य धनु राशि में प्रवेश करेंगे यानी कल की संक्रांति धनु संक्रांति है. सूर्य इस समय वृश्चिक राशि में है और कल वृश्चित राशि से निकल कर धनु राशि में प्रवेश करेंगे.

धनु राशि में प्रवेश करने के बाद सूर्य इस राशि में पूरे एक माह तक रहेंगे.वैसे तो पूजा-पाठ और पुण्य-काल के लिए श्रेष्ठ हैं, मगर इस महीने में कोई भी शुभ कार्य, जैसे- शादी-विवाह, गृह प्रवेश, भूमि पूजन आदि वर्जित रहता है. इसलिए इस मास को खरमास कहा जाता है. मगर इस माह का ओडिशा में विशेष महत्व है. धनु संक्रांति में बहुत भगवान जगन्नाथ की विशेष पूजा का विधान है. इस दिन मुआन नामक मिठाठी भगवान जगन्नाथ को अर्पित की जाती है. 

धनु संक्रांति का क्या है विशेष महत्व?

धनु संक्रांति हिंदू पंचाग के नौवें या दसवें महीने में पड़ती है. इस बार यह संक्रांति दसवें यानी पौष माह में पड़ रही है. इस माह की संक्रांति के दिन गंगा यमुना स्नान का महतवा मन जाता है। मगर संक्रांति की ही तरह इस दिन भी पवित्र नदियों के स्नान करने का विधान है. इस दिन हवन और दान आदि भी करने को शुभ माना जाता है. इस दिन पवित्र सरोवरों या नदियों में स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है. चूंकि हर संक्रांति का सम्बंध सूर्य है, इसलिए इस दिन पवित्र स्नान के बाद सूर्य को अधर्य अवश्य देना चाहिए. इस दिन सूर्यदेव की पूजा करना काफी शुभ होता है. 

कब समाप्त होगी धनु संक्रांति और साथ में खरमास?

अंग्रेजी कलेंडर के अनुसार धनु संक्रांति साल के आखिरी महीने दिसम्बर में पड़ती है. और इसके शुरू होते ही हिंदू समाज में शुभ कार्य बंद हो जाते हैं. चूंकि पूरे एक मास तक शुभ कार्य बंद रहते हैं, इसलिए लोगों के मन में यह जिज्ञासा हो सकती है कि यह कब और कैसे खत्म होता है. यह विशिष्ट अवधि मकर संक्रांति दिन समाप्त होती है. मगर संक्रांति का हिंदुओं के लिए काफी विशेष महत्व है. क्योंकि इस दिन सूर्य धनु राशि से निकल कर मकर राशि में तो प्रवेश करते ही हैं, साथ ही सूर्य उत्तरायण भी हो जाते हैं. सूर्य के उत्तरायण होने के बाद उत्तरी गोलार्द्ध में दिन की लम्बाई बढ़ने लगती है और ग्रीष्म ऋतु की ओर अग्रसर हो जाता है. 

धनु राशि के अनुष्ठान

  • भगवान सूर्य भगवान की पूजा ओर अर्घ्य देना.
  • पवित्र सरोवरों जैसे, गंगा आदि में स्नान करना.
  • भगवन सत्यनारायण की व्रत कथा का पाठ और श्रवण करना.
  • भगवन विष्णु की केले के पत्ते, फल, सुपारी, पंचामृत, तुलसी, आदि से भोग लगाकर पूजा करना.
  • देवी लक्ष्मी, महादेव और ब्रह्मा जी की आरती करना.
  • भगवान जगन्नाथ की पूजा करना.

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