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रांची/डेस्क: आजकल युवाओं का शाम बिताने का तरीका पूरी तरह बदल गया हैं. वह दौर गया जब पार्टी और हैंगआउट का मतलब सिर्फ शराब और धुएं से भरी रातें हुआ करती थी. अब जेन-जी ने इस पार्टी कल्चर को पूरी तरह रिसेट कर दिया हैं. अब “होश में रहना” यानी सोबर रहना, नया स्टाइल और एक तरह का फ्लेक्स बन गया हैं.
शराब का ग्लोबल बिजनेस झटका
जेन-जी की इस बदलाव की वजह से शराब उद्योग को बड़ा झटका लगा हैं. रिपोर्ट के अनुसार, शराब कंपनियों के शेयरों में करीब 830 मिलियन डॉलर की गिरावट आई हैं. यहां तक कि जिम बीम (Jim Beam) जैसे मशहूर ब्रांड्स को अपना उत्पादन रोकना पड़ा. यह साफ संकेत है कि पुरानी शराब अब नई पीढ़ी को आकर्षित नहीं कर रही.
जेन-जी क्यों कर रही है कम शराब का सेवन
नीलसन आईक्यू (NIQ) की 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, जेन-जी मिलेनियल्स की तुलना में प्रति व्यक्ति 20% कम शराब पी रही है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे बाहर जाना बंद कर रही है बल्कि आज का युवा “क्वालिटी ओवर क्वांटिटी” पर भरोसा करता हैं. करीब 56% जेन-जी कंज्यूमर अब कई सस्ते ड्रिंक्स के बजाय एक-दो हाई-क्वालिटी प्रीमियम कॉकटेल को प्राथमिकता देते हैं.
पार्टी टाइम में बदलाव
जेन-जी का पार्टी टाइम भी बदल गया हैं. अब रात 11 बजे के बाद नहीं, बल्कि शाम 4 से 7 बजे के बीच बार और कैफे जाना ज्यादा पसंद करते हैं. इस समय स्लॉट में 34% का उछाल आया हैं. कारण साफ है वे अपनी नींद और अगली सुबह की प्रोडक्टिविटी के साथ समझौता नहीं करना चाहते.
आज के हसल कल्चर और स्टार्टअप माइंडसेट वाले युग में, शराब को करियर का दुश्मन माना जाने लगा हैं. टाइम मैगजीन और बिजनेस इनसाइडर की रिपोर्ट्स बताती है कि कम शराब पीने का सीधा कनेक्शन वर्क-एफिशिएंसी बढ़ने से हैं. जेन-जी अब फूड और ड्रिंक्स को मेडिसिन की तरह चुनती हैं. वे ऐसे ड्रिंक्स चाहती हैं जो उनके गट हेल्थ, हार्मोन्स और ब्लड शुगर को बैलेंस करें. यही वजह है कि एडेप्टोजेनिक ड्रिंक्स और फंक्शनल एलिक्सर्स की मांग तेजी से बढ़ी हैं. ये ड्रिंक्स आपको रिलैक्स करते हैं, लेकिन मदहोश नहीं करते.
हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री में नई रणनीतियां
हॉस्पिटैलिटी सेक्टर अब एक तरह का सर्वाइवल गेम बन चुका हैं. टेक्नोमिक की 2025 की ग्लोबल ट्रेंड रिपोर्ट में नया शब्द आया “इनहेरिवेशन”. इसका मतलब है, पुराने क्लासिक ड्रिंक्स को मॉडर्न और ग्लोबल ट्विस्ट के साथ पेश करना, जैसे मिसो-कारमेल या पांडान का इस्तेमाल. आज बार्स सिर्फ शराब नहीं बेच रहे, बल्कि बेवरेज-फॉरवर्ड मॉडल्स पर शिफ्ट हो रहे है, जैसे बोबा टी, स्पेशल कॉफी और जीरो-प्रूफ स्पिरिट्स. सोशल मीडिया की भी इसमें बड़ी भूमिका हैं. मिंटेल के डेटा के मुताबिक, 54% जेन-जी अपना वेन्यू दोस्तों के इंस्टाग्राम फीड देखकर चुनती हैं.
अमेरिका और यूरोप में सॉफ्ट-क्लबिंग और अल्कोहल-फ्री नेटवर्किंग इवेंट्स बड़े मार्केट बन चुके हैं. भारत में भी, खासकर बेंगलुरु, मुंबई और दिल्ली में यह ट्रेंड तेजी से फैल रहा हैं. युवा अब शराब पर पैसा खर्च करने के बजाय एक्सपीरियंस-लीड वेन्यूज़ और इंस्टाग्राम एस्थेटिक्स को महत्व देते हैं. रिवेन्यू मैनेजमेंट सॉल्यूशंस (RMS) के आंकड़े बताते है कि 56% जेन-जी हफ्ते में 5 बार या उससे ज्यादा बार बाहर खाना खाती हैं. उनके लिए कीमत नहीं, बल्कि एक्सपीरियंस+ब्रांड वैल्यू+एस्थेटिक मायने रखता हैं.
भविष्य की नई इकोनॉमी
कुल मिलाकर, हम एक नई कल्चरल शिफ्ट के दौर में हैं. अब होश ही असली पावर हैं. शराब कंपनियों को अपनी स्ट्रैटेजी पूरी तरह बदलनी होगी, क्योंकि आने वाला मार्केट वेलनेस और क्रिएटिविटी बेचने वालों का होगा. अगली बार जब आप किसी कैफे में किसी युवा को ग्रीन टी या जीरो-अल्कोहल कॉकटेल के साथ लैपटॉप पर काम करते देखें, तो समझ जाइए यह सिर्फ एक चॉइस नहीं, बल्कि नई पीढ़ी की पूरी इकोनॉमी का नया चेहरा हैं.
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