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रांची/डेस्क: केंद्र सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लेते हुए देशभर के सभी राज्यों में राजभवन का नाम बदलकर ‘लोकभवन’ कर दिया हैं. केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद यह बदलाव आधिकारिक रूप से लागू हो गया हैं. यह केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि शासन की नई सोच “जनसेवा सर्वोपरि” का प्रतीक हैं. पिछले 11 वर्षों में मोदी सरकार ने ऐसे कई प्रतीकात्मक बदलाव किए है, जिनका उद्देश्य शक्ति और विशेषाधिकार की छवि को हटाकर कर्तव्य, सेवा और लोककल्याण की भावना को बढ़ाना हैं.
नाम बदलने की नीति: सत्ता नहीं, सेवा का संदेश
सरकार का मानना है कि राजसी या सत्ता-सूचक नाम लोकतांत्रिक सोच के विपरीत हैं. ऐसे में उन्हें बदलकर ऐसे नाम दिए जा रहे है, जो “शासन सेवा के लिए है, शाही ठाट के लिए नहीं” का संकेत देते हैं. लोकभवन का अर्थ है “जनता का भवन” यानी राज्यपाल का कार्यालय अब जनता से जुड़ा, सेवा-प्रधान प्रतीक माना जाएगा, न कि राजसत्ता का अवशेष.
राजपथ से कर्तव्य पथ
पहले इसे राजपथ कहा जाता था, यानी राजाओं का रास्ता या शक्ति का प्रतीक" अब इसका नाम कर्तव्य पथ रखा गया है यानी “कर्तव्य का रास्ता”. यह संदेश देता है कि सत्ता कोई अधिकार नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और सेवा का अवसर हैं.
रेस कोर्स रोड से लोक कल्याण मार्ग
प्रधानमंत्री का आधिकारिक निवास पहले रेस कोर्स रोड कहलाता था, जिसे 2016 में लोक कल्याण मार्ग नाम दिया गया मतलब “लोक कल्याण का रास्ता”. यह नाम जनता के भले के लिए काम करने का भाव दिखाता है, न कि विशेषाधिकार या प्रतिष्ठा का.
सेवा तीर्थ
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) वाले नए परिसर को सेवा तीर्थ नाम दिया गया है यानी “सेवा का पवित्र स्थान”. नाम यह बताता है कि यह जगह सेवा और समर्पण की भावना का केंद्र है ताकि वह स्थान केवल प्रशासनिक केंद्र न होकर सेवा-प्रधान कार्यों का प्रतीक बने.
सेंट्रल सचिवालय से कर्तव्य भवन
जो बड़ा प्रशासनिक केंद्र पहले सेंट्रल सचिवालय कहलाता था, अब कर्तव्य भवन कहलाएगा. यह नाम इस बात पर जोर देता है कि सरकारी पद कोई सम्मान नहीं, बल्कि जनता की सेवा का कर्तव्य हैं.
अब राजभवन भी बने ‘लोकभवन’
राजभवन का नाम बदलकर लोकभवन करना इस श्रृंखला का सबसे बड़ा और व्यापक निर्णय हैं. राजभवन अब केवल राज्यपाल का आवास या कार्यालय नहीं रहेगा, बल्कि एक ऐसा प्रतीक बनेगा जहां जनता की आवाज को महत्व दिया जाए और ‘राज’ की जगह ‘लोक’ को सर्वोपरि रखा जाए.
लोकभवन: लोकतंत्र की नई परिभाषा
ये नाम परिवर्तन केवल संकेतात्मक नहीं, बल्कि जनता-केन्द्रित शासन दर्शन का नया अध्याय हैं. हर इमारत का नाम यह संदेश दे रहा है कि सत्ता का उद्देश्य जनता की सेवा करना है, न कि अधिकार जताना.
गुजरात-महाराष्ट्र में हुआ पहला ऐलान
गुजरात और महाराष्ट्र के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने एक्स पर तस्वीरें शेयर करते हुए बताया कि अब गुजरात राजभवन को ‘गुजरात लोकभवन’ कहा जाएगा. अन्य राज्यों में भी इसी फॉर्मेट पर नाम बदलने की तैयारी शुरू हो गई हैं.
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