मनरेगा को 'राम-राम'! मजदूरों को रोजगार देने आ गया 'जी राम जी'! नाम के अलावा क्या-क्या बदला है?

By : News11 Bharat , Pramod Kumar
मनरेगा को 'राम-राम'! मजदूरों को रोजगार देने आ गया 'जी राम जी'! नाम के अलावा क्या-क्या बदला है?

न्यूज11  भारत

रांची/डेस्क: संप्रग (UPA) सरकार के जमाने में रोजगार देने के लिए शुरू की गयी नरेगा (बाद में मनरेगा) का नाम नरेन्द्र मोदी सरकार ने बदल दिया है. मोदी सरकार ने विकसित भारत के लिए ग्रामीणों और मजदूरों को रोजगार देने वाली इस योजना को नया नाम देकर कुछ नया करने की पहल ही है. केन्द्र की मोदी सरकार ने मनरेगा का नाम बदल कर विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक यानी VB-जी राम जी कर दिया है और यह गुरुवार को लोकसभा से पारित भी हो गया है. जब से मनरेगा का नाम बदलने की चर्चा शुरू हुई है तब से विपक्ष इसका लगातार विरोध कर रहा है. गुरुवार को बिल को लोकसभा में पेश किये जाने के बाद भी इस पर खूब हंगामा हुआ. विपक्ष ने तो इसकी प्रतियां भी फाड़कर अपना विरोध प्रकट किया.

VB-जी राम जी से मजदूरों के जीवन में क्या-क्या आयेगा बदलाव?

योजना का नाम बदलने का विरोध तो खैर अपनी जगह है और उसके राजनीतिक कारण भी हो सकते हैं. असल बात यह है कि VB-जी राम जी नाम की जो नयी योजना पेश हुई है, उससे ग्रामीणों और मजदूरों के जीवन में क्या-क्या बदलाव आने वाला है. आखिरकार यह योजना तो उनके लिए है. क्योंकि उनको मिलने वाला लाभ और सुविधा ही इस योजना की सार्थकता सिद्ध करेगी. वैसे सरकार कह रही है कि देश विकसित भारत की कल्पना लेकर आगे बढ़ रहा है, इसमें गांवों को विकसित किये बिना यह कल्पना बेमानी है. गांवों के समग्र विकास को ध्यान में रखकर ही इस योजना की शुरुआत की गयी है.

नए विधेयक के तहत हर ग्रामीण परिवार को 125 दिन का रोजगार दिये जाने का प्रावधान किया गया है, जबकि पिछली योजना में यह 100 दिन था।
इस योजना में बिना किसी विशेष कौशल के काम करने वाले परिवारों को काम दिये जाने का प्रावधान किया गया है.

  • मनरेगा में योजना का खर्च केन्द्र के साथ राज्य सरकारों को भी वहन करना होगा, पहले इसका पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाती थी. इस योजना का विरोध करने की असल वजह यह भी है, क्योंकि राज्य सरकारें मान रही हैं कि उन पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है.
  • पूर्वोत्तर राज्यों, हिमालयी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, जैसे- उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू और कश्मीर, को योजना का सिर्फ 10 प्रतिशत वहन करना है, 90 प्रतिशत केंद्र वहन करेगा.
  • शेष राज्यों की बात करें तो उन्हें 40 प्रतिशत का खर्च वहन करना होगा, केन्द्र सरकार 60 प्रतिशत योजना पर खर्च करेगी.
  • इसके अलावा जिन केंद्र शासित राज्यों में विधानसभा नहीं हैं, वहां का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाएगी.
  • VB-जी राम जी में मजदूरों की मजदूरी के भुगतान की अवधि को कम किया गया है. VB-जी राम जी में मजदूरों को हफ्ते-हफ्ते भुगतान किया जायेगा. जबकि मनरेगा में यह 15-15 दिनों में होता था.  नयी योजना में मजदूरी भुगतान के लिए साप्ताहिक या काम खत्म होने के तुरंत बाद करने की व्यवस्था की गयी है. किसी कारण विलम्ब हो भी जाये तो अधिकतम 15 दिनों के भीतर भुगतान करना जरूरी होगा.
  • 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध नहीं कराये जाने पर बेरोजगारी भत्ते का भी प्रावधान रखा गया है.
  • विधेयक में एक बात जो अभी तक स्पष्ट नहीं है, वह है मजदूरी की राशि. सम्भव है मजदूरी की दर केंद्र और राज्य सरकारें अलग-अलग तय कर सकती हैं.
  • बुआई और कटाई के दिनों में 60 दिन का विशेष समय का जिक्र किया गया है. इस दौरान मजदूरों को काम नहीं दिया जाएगा ताकि वे खेती के काम के लिए उपलब्ध रह सकें. हालांकि इसका भी विपक्ष विरोध कर रहा है. उसे आशंका है कि इस दौरान मजदूरों के बेरोजगार होने का भी भय है. यह आशंका है भी तो एक बात यहां यह ध्यान में रखना होगा कि चाहे मनरेगा हो या VB-जी राम जी योजना, एक निश्चित अवधि के लिए मजदूरी की इनमें व्यवस्था है, चाहे वह 100 दिन हो या फिर 125 दिन. अब जो रोजगार गारंटी दी जा रही है, वह खेती-बारी के दिनों को अलग रख कर दी जा रही है जबकि मनरेगा में यह व्यवस्था नहीं थी.

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