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रांची/डेस्क: प्रोफेशनल नेटवर्किंग के लिए दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाला प्लेटफॉर्म LinkedIn अब एक बड़े विवाद में घिरता नजर आ रहा हैं. एक नई रिपोर्ट ने दावा किया है कि यह प्लेटफॉर्म यूजर्स की ऑनलाइन गतिविधियों को उनकी जानकारी के बिना ट्रैक कर सकता हैं. इस खुलासे के बाद डेटा प्राइवेसी और साइबर सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई हैं.
BrowserGate रिपोर्ट ने क्या खोला राज
साइबर सिक्योरिटी रिसर्च से जुड़ी BrowserGate रिपोर्ट के अनुसार, LinkedIn हर बार पेज लोड होने पर यूजर के ब्राउजर में एक खास JavaScript स्क्रिप्ट इंजेक्ट करता हैं. यह स्क्रिप्ट यूजर के सिस्टम में इंस्टॉल Chrome एक्सटेंशन को स्कैन करने की क्षमता रखती हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 6,236 एक्सटेंशन तक की पहचान की जा सकती है, जिससे यह पता लगाया जा सकता है कि यूजर किन-किन टूल्स का इस्तेमाल कर रहा हैं.
कैसे काम करती है यह ट्रैकिंग तकनीक
यह स्क्रिप्ट एक्सटेंशन के यूनिक आईडी से जुड़े फाइल रिसोर्स तक पहुंचने की कोशिश करती हैं. यह तकनीक खासतौर पर Chromium आधारित ब्राउजर में लंबे समय से इस्तेमाल हो रही है लेकिन LinkedIn जैसे बड़े प्लेटफॉर्म द्वारा इसके इस्तेमाल ने नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं. रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि ट्रैकिंग केवल एक्सटेंशन तक सीमित नहीं हैं. यूजर के डिवाइस से जुड़ी कई अहम जानकारियां भी जुटाई जा रही है, जैसे-
- CPU कोर की संख्या
- टाइम जोन और भाषा सेटिंग
- बैटरी स्टेटस
- उपलब्ध मेमोरी
- स्क्रीन साइज और स्टोरेज क्षमता
इन सभी जानकारियों को मिलाकर एक तरह का “डिजिटल फिंगरप्रिंट” तैयार किया जा सकता है, जिससे किसी यूजर की पहचान और उसकी ऑनलाइन गतिविधियों को ट्रैक करना आसान हो जाता हैं.
डेटा कहां जा रहा है, इस पर सस्पेंस बरकरार
रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि यह डेटा साइबर सिक्योरिटी कंपनी HUMAN Security को भेजा जा सकता है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई हैं. दिलचस्प बात यह है कि पहले जहां 2025 में लगभग 2000 एक्सटेंशन स्कैन किए जा रहे थे, वहीं 2026 में यह संख्या बढ़कर 6,236 तक पहुंच गई है, जो ट्रैकिंग के तेजी से बढ़ते दायरे को दर्शाता हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कई पॉपुलर टूल्स, जैसे Lusha, ZoomInfo और Apollo भी इस स्कैनिंग के दायरे में आ सकते हैं. इससे प्रोफेशनल यूजर्स और कंपनियों दोनों की डेटा सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
यूजर्स के लिए क्यों बढ़ी चिंता
साइबर एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस तरह की ट्रैकिंग यूजर्स की प्राइवेसी के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं. बिना स्पष्ट जानकारी या अनुमति के इस तरह का डेटा कलेक्शन पारदर्शिता और भरोसे पर असर डाल सकता हैं.
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