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रांची/डेस्क: हर वर्ष अश्विनी कृष्ण पक्ष अष्टमी को महिलाएं जिउतिया व्रत करती हैं. इस व्रत को जितिया व्रत भी कहते हैं. संतान की लंबी आयु, सुख, समृद्धि आदि की कामना के लिए पुत्र या पुत्रीवती महिलाएं 14 सितंबर यानि आज सर्वार्थ सिद्ध योग में निर्जला-निराहार जिउतिया व्रत करेंगी. रविवार को सरगही सुबह 5:53 से पहले करने का मुहूर्त हैं. जीवित पुत्रिका व्रत माताएं अपने पुत्र की दीर्घायु की कामना के लिए रविवार की सुबह से ही निराहार रहकर करेंगी. सोमवार को पारण सुबह 6:27 के बाद करना होगा. इस व्रत के दिन महिलाएं जिउतिमा धागा धारण करती हैं. इस धागे में जीमूतवाहन के प्रतिक सोने या चांदी का निर्मित आकृती लगी रहती हैं. इस व्रत में पुरे दिन व्रत रखने के बाद संध्या में स्नान के पश्चात महिलाएं स्वयं अथवा पुरोहित से कथा सुनती हैं और जीमूतवाहन को विधि विधान से पूजा कर दान-दक्षिणी प्रदान करती हैं. पूजा के बाद पुत्र के गले में यह धागा लगाकर लंबी आयु और सुख समृद्धि की कामना करती हैं. इस व्रत की मान्यता यह है कि माताओं के इस व्रत रखने से पुत्र पर आए संकट टल जाते हैं.
व्रत की विधि: माताएं इस दिन निर्जला उपवास करती हैं. सुबह स्नान करके भगवन विष्णु, माता जीमूतवाहन व अपने इष्टदेव की पूजा करती हैं. जो महिलाएं व्रत करती है वो पुरे दिन जल तक ग्रहण नहीं करती और संतान की सुख समृद्धि शांति लंबी आयु की मंगलकामना करती हैं. व्रत के अगले दिन प्रातः पारण करके व्रत को पूरा किया जाता हैं.
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