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रांची/डेस्क: घाना के अकारा में अबेबुओ यानी काल्पनिक ताबूतों की परंपरा बेहद लोकप्रिय हैं. ये ताबूत किसी भी सामान्य लकड़ी के बक्से की तरह नहीं होते, बल्कि मृतक के जीवन और पहचान को दर्शाने वाले रंग-बिरंगे और आकार में अद्भुत होते हैं.
जिंदगी की कहानी ताबूत में
हर ताबूत मृतक के जीवन की कहानी बताता हैं. एक किसान का ताबूत उसके औजार या फसलों के आकार में हो सकता है, जबकि स्कूल मालिक का ताबूत स्कूल के आकार में बनाया जाता हैं. मछली, केकड़ा, हवाई जहाज और मोर जैसी आकृतियां भी ताबूतों पर देखी जा सकती हैं.
व्यक्तित्व और पहचान का प्रतीक
ताबूत का डिजाइन मृतक की पहचान और जीवन शैली के अनुसार चुना जाता हैं. शेर के आकार का ताबूत केवल शक्ति और स्थिति का प्रतीक होने के कारण विशिष्ट लोगों के लिए आरक्षित रहता हैं. शाही परिवारों के ताबूतों में उनके प्रतीक चिन्ह शामिल होते हैं.
निर्माण और लागत
प्रत्येक ताबूत बनाने में लगभग दो हफ्ते का समय लगता हैं. इसकी कीमत लगभग 700 डॉलर से शुरू होती है, जो डिजाइन और लकड़ी के प्रकार के हिसाब से बढ़ सकती हैं. परिवार मिलकर बढ़ई को मृतक की जीवन गाथा बताते हैं और ताबूत का निर्माण शुरू होता हैं.
अंतिम संस्कार का उत्सव
घाना में अंतिम संस्कार सिर्फ किसी के जाने का दुख नहीं बल्कि जीवन का उत्सव भी होता हैं. संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ लोग अपने प्रियजन को धूमधाम से विदाई देते हैं. ये ताबूत मृतक की याद और सम्मान का एक अनोखा तरीका बन गए हैं.
कला के रूप में ताबूत
आज ये ताबूत केवल अंतिम संस्कार तक सीमित नहीं है बल्कि कला प्रेमियों के बीच संग्रहणीय वस्तु बन चुके हैं. अकारा में कुछ दुकानें विशेष रूप से इन ताबूतों को बनाने के लिए प्रसिद्ध है, जो मृतक की जीवन गाथा को जीवंत बनाती हैं.
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