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रांची/डेस्क: हिंदू धर्म के प्रमुख पर्व चैत्र नवरात्रि का आज से विधिवत शुभारंभ हो गया हैं. नौ दिनों तक चलने वाले इस पावन पर्व में देवी शक्ति की उपासना, साधना और व्रत का विशेष महत्व माना जाता हैं. श्रद्धालु इन दिनों में मां के नौ स्वरूपों की पूजा कर अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं.
इस बार विशेष संयोगों में मनाई जा रही नवरात्र
ज्योतिषीय दृष्टि से इस वर्ष की नवरात्रि बेहद खास मानी जा रही हैं. इस बार नवरात्र पूरे नौ दिनों की होगी और कई शुभ योगों का संगम बन रहा हैं. सर्वार्थ सिद्धि योग, पंचक और खरमास जैसे संयोग इस पर्व को और भी महत्वपूर्ण बना रहे हैं. मान्यता है कि इस बार मां दुर्गा का आगमन पालकी पर हो रहा है, जो सुख-समृद्धि का संकेत माना जाता है, जबकि विदाई हाथी पर होगी, जो शुभता और स्थिरता का प्रतीक हैं.
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना का विशेष महत्व होता हैं. आज कलश स्थापना के लिए दो शुभ मुहूर्त बताए गए है:
सुबह: 6:55 बजे से 7:52 बजे तक
दोपहर: 12:05 बजे से 12:53 बजे तक
इन समयों में विधिपूर्वक कलश स्थापना करना अत्यंत शुभ फलदायी माना गया हैं.
ऐसे करें कलश स्थापना और पूजा
नवरात्र के पहले दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को साफ करें. एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. इसके बाद तांबे, पीतल या मिट्टी के कलश में जल भरकर उसमें अक्षत और सिक्का डालें. आम के पत्ते रखें और ऊपर नारियल स्थापित करें. कलश स्थापना के बाद घी का दीपक जलाएं, फूल अर्पित करें और दुर्गा चालीसा व दुर्गा सप्तशती का पाठ करें.
पूजा सामग्री और भोग
पूजा के लिए हल्दी, कुमकुम, कपूर, धूप, नारियल, फल, पंचामृत, सूखे मेवे आदि का उपयोग किया जाता हैं. भोग में फल, खीर, पेठा या घर का सात्विक भोजन अर्पित करना शुभ माना गया हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन नौ दिनों में साधना करने से न केवल मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, बल्कि ग्रह दोष भी शांत होते हैं. विशेष रूप से नवग्रह से संबंधित समस्याओं के निवारण के लिए यह समय अत्यंत फलदायी माना जाता हैं.
नौ दिनों में मां के नौ स्वरूपों की पूजा
नवरात्र के प्रत्येक दिन मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की आराधना की जाती है:
19 मार्च: मां शैलपुत्री
20 मार्च: मां ब्रह्मचारिणी
21 मार्च: मां चंद्रघंटा
22 मार्च: मां कूष्मांडा
23 मार्च: मां स्कंदमाता
24 मार्च: मां कात्यायनी
25 मार्च: मां कालरात्रि
26 मार्च: मां महागौरी
27 मार्च: मां सिद्धिदात्री
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